Bihar News: गंगा जल संधि पर सीएम सम्राट चौधरी का जोर, बोले- बिहार की जल संपदा बनेगी आर्थिक समृद्धि का आधार
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने पटना में गंगा जल संधि और जल सुरक्षा पर आयोजित सेमिनार में नदियों के वैज्ञानिक प्रबंधन, गाद के उपयोग और सोन नदी जल बंटवारे पर बात की। उन्होंने जल संसाधनों को बिहार की आर्थिक समृद्धि का आधार बनाने पर जोर दिया।

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की जल सुरक्षा और नदियों के बेहतर प्रबंधन को विकास की अहम कड़ी बताया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को पटना के चाणक्या होटल में जल संसाधन विभाग की ओर से ‘गंगा जल संधि: बिहार की जल सुरक्षा’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में शामिल हुए सीएम ने कलश में गंगा जल डालकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार की नदियां, जल संसाधन और आबादी राज्य की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। इनका सही इस्तेमाल कर बिहार को समृद्ध बनाया जा सकता है।
बिहार के विकास के लिए जल सुरक्षा जरूरी
सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के समग्र विकास, कृषि विस्तार और औद्योगिक प्रगति के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता जरूरी है। राज्य को पेयजल, खेतों की सिंचाई और उद्योगों के संचालन के लिए पानी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गंगा जल और फरक्का समझौते से जुड़े मामलों में बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। सरकार का प्रयास है कि जल संसाधनों का उपयोग राज्य की जरूरतों और विकास की संभावनाओं के अनुरूप किया जाए।
सोन नदी जल बंटवारे का विवाद सुलझने का दावा
सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब 25 वर्षों से लंबित यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सहयोग से सुलझाया गया है। उनके मुताबिक, इस समझौते के तहत बिहार को सोन नदी का तीन-चौथाई यानी 75 प्रतिशत पानी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
गंगा की गाद का निर्माण कार्यों में होगा इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने गाद प्रबंधन को लेकर राज्यस्तरीय नीति तैयार की है। इसके तहत गंगा समेत अन्य नदियों से निकलने वाली गाद को वैज्ञानिक तरीके से हटाने और उसका उपयोग सुनिश्चित करने पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा की गाद और मिट्टी को आम लोगों के उपयोग के साथ सड़क और अन्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए आने वाले समय में बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच समझौता किया जाएगा। सीएम ने गाद प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी ठोस नीति बनाने की जरूरत बताई।
गंगा के तटबंधों को मजबूत करने पर जोर
सम्राट चौधरी ने गंगा के तटबंधों के निर्माण और उनके सुदृढ़ीकरण को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि नदी के प्रवाह, उसकी स्थिति और गाद के जमाव को वैज्ञानिक तरीके से समझना जरूरी है। इसके लिए सेमिनार में शामिल विशेषज्ञों को गंगा का हवाई सर्वेक्षण कराने का सुझाव दिया गया, ताकि वे नदी की वास्तविक स्थिति का आकलन कर सकें और उसके आधार पर प्रभावी सुझाव दे सकें।
एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की नदियों में कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना और रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा करने की क्षमता है। जल और गाद का सही प्रबंधन राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य एक करोड़ लोगों के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना है। इस लक्ष्य को हासिल करने में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग भी अहम भूमिका निभाएगा।
जल प्रबंधन से समृद्ध बिहार बनाने का संकल्प
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार बिहार की नदियों को आर्थिक समृद्धि का आधार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। वैज्ञानिक जल प्रबंधन, विशेषज्ञों के सुझाव और केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान बाढ़ और जल प्रबंधन से संबंधित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।


