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नर्सिंग फर्जीवाड़े में शामिल गांधी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एवं नर्सिंग स्टाफ पर सख्त कार्रवाई को लेकर एनएसयूआई ने सौंपा ज्ञापन

अनसूटेबल नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में अनैतिक सहयोग किया, जिससे प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

नर्सिंग फर्जीवाड़े में शामिल गांधी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एवं नर्सिंग स्टाफ पर सख्त कार्रवाई को लेकर एनएसयूआई ने सौंपा ज्ञापन
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MP News : भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ( एनएसयूआई ) ने गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल की डीन को शिकायत कर मांग की है कि प्रदेश में हुए नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े में शामिल प्रोफेसरों एवं नर्सिंग स्टाफ पर त्वरित कार्रवाई की जाए। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने बताया कि नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता में हुई अनियमितताओं में निरीक्षण अधिकारियों की अहम भूमिका रही है, जिसमें गांधी मेडिकल कॉलेज के कई प्रोफेसर एवं नर्सिंग स्टाफ संलिप्त पाए गए थे उन्होंने अनसूटेबल नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में अनैतिक सहयोग किया, जिससे प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

MP News : इस घोटाले से जुड़े कई अधिकारियों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। रवि परमार ने बताया कि गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के एक प्रोफेसर डॉ. हरि सिंह मकवाना पर नर्सिंग फर्जीवाड़े में एफआईआर दर्ज की हुई थी , लेकिन उनकी सेवाएं आज तक समाप्त नहीं की गई हैं एनएसयूआई ने डॉ मकवाने का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की मांग को लेकर मप्र मेडिकल काउंसिल की रजिस्ट्रार को भी शिकायत कि हैं।

MP News : नर्सिंग महाघोटाले में जिनको नोटिस जारी हुए थे उनमें जीएमसी के पूर्व प्राचार्य रोसी शाहुल समेत प्रोफेसर में डॉ जितेंद्र महावर , डॉ हरिसिंह मकवाना , डॉ संदीप कुमार मर्सकोले , डॉ वीरेंद्र धुर्वे वहीं नर्सिंग स्टाफ में रजनी नायर , प्रियदर्शनी डेहरिया दीपिका कुंभारे , राजश्री मालवीय शामिल हैं। रवि परमार ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो एनएसयूआई छात्र हित में बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द इस विषय में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

MP News : एनएसयूआई की प्रमुख मांगें:-
1. नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े में शामिल गांधी मेडिकल कॉलेज के सभी दोषी प्रोफेसरों एवं नर्सिंग स्टाफ पर त्वरित कार्रवाई हो।
2. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
3. भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।


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