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New criminal law implemented: आज से देशभर में नए आपराधिक कानून लागू,यहां जानिए किस जुर्म के लिए कौन-सी धारा

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नई दिल्ली। New criminal law implemented: एक जुलाई से देशभर में नए आपराधिक कानून लागू हो गए।

नई दिल्ली। New criminal law implemented: एक जुलाई से देशभर में नए आपराधिक कानून लागू हो गए। इसके बाद आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता, सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) को लागू कर दिया जाएगा। यह तीनों ही पिछले साल संसद में पास होकर कानून का रूप ले चुके हैं।




New criminal law implemented: आईपीसी की बात करें तो इसमें आतंकवाद को लेकर कोई परिभाषा नहीं दी गई थी। कौन सा अपराध आतंकवाद की श्रेणी में आएगा इसका भी जिक्र नहीं किया गया था। नए कानून के तहत आतंकवाद को विस्तार से परिभाषित किया गया है। अब जो भी भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है उसे आतंकवाद की श्रेणी में रखा गया है।


किस अपराध के लिए कितनी सजा


. आतंकी गतिविधि से मौत होने पर मौत की सजा के अलावा उम्रकैद और जुर्माने का प्रावधान।
. आतंकी साजिश रचने, कोशिश करने या आतंकी की मदद करने पर पांच साल से लेकर उम्रकैद की सजा और जुर्माना।
. आतंकी संगठन से जुड़ने पर उम्रकैद और जुर्माने का प्रावधान।
. आतंकी को जानबूझकर छिपाने पर तीन साल से उम्रकैद और जुर्माने का प्रावधान।


अपराध एवं दंड को किया गया परिभाषित और पुनर्परिभाषित


. छीनाझपटी एक संज्ञेय, गैर जमानती और गैर शमनीय अपराध (बीएनएस धारा-304)
. आतंकवादी कृत्य की परिभाषा: इसमें ऐसे कृत्य शामिल हैं जो भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं या किसी समूह में आतंक फैलाते हैं (बीएनएस धारा-113)
. राजद्रोह में परिवर्तन: राजद्रोह के अपराध को समाप्त कर दिया गया है तथा भारत की एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को दंडित करने के लिए देशद्रोह शब्द का इस्तेमाल किया है (बीएनएस धारा-152)
. मॉब लिंचिंग को एक ऐसे अपराध के रूप में शामिल किया गया जिसके लिए अधिकतम मृत्युदंड है (बीएनएस धारा 103-(2))
. संगठित अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है (बीएनएस धारा-111)



आईपीसी की धाराओं को बीएनएस की इन धाराओं बदला 


अपराध आईपीसी बीएनएस
हत्या धारा 302 धारा 103
हत्या का प्रयास धारा 307 धारा 109
गैर इरादतन हत्या धारा 304 धारा 105
दहेज हत्या धारा 304बी धारा 80
चोरी धारा 379 धारा 303
दुष्कर्म धारा 376 धारा 64
छेड़छाड़ धारा 354 धारा 74
धोखाधड़ी धारा 420 धारा 318
पति द्वारा क्रूरता का शिकार महिलाएं धारा 498ए धारा 85
लापरवाही से मौत धारा 304ए धारा 106
आपराधिक षडयंत्र के लिए सजा धारा 120बी धारा 61
देश के खिलाफ युद्ध धारा 121, 121ए धारा 147, 148
मानहानि धारा 499, 500 धारा 356
लूट धारा 392 धारा 309
डकैती धारा 395 धारा 310


 
भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस) में मुख्य परिवर्तन


. आईपीसी में धाराओं की संख्या 511 से घटाकर बीएनएस में 358 कर दी गई हैं।
. 20 नए अपराधों को जोड़ा गया है।
. कई अपराधों के लिए अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है।
. छह छोटे अपराधों के लिए सामूदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है।
. कई अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया है।
. कई अपराधों में सजा की अवधि को बढ़ाया गया है।
भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस) की कुछ विशेषताएं...
. महिला और बच्चों के खिलाफ अपराधों को एक अध्याय में समेकित किया गया है।
. धारा 69 झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
. धारा 70 (2) सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है।



आम लोगों के लिए यह बदलेगा



छोटी सी छोटी शिकायत दर्ज कराने के लिए थानों के चक्कर लगाने या पुलिसकर्मियों को रिश्वत देने का दौर खत्म हो जाएगा। 
हत्या, लूट, दुष्कर्म की भी ऑनलाइन एफआईआर दर्ज होगी।
एक जिले में हुए अपराध की जीरो एफआईआर दूसरे जिले में कराई जा सकेगी। थाना क्षेत्र का हवाला देकर पुलिस टरका नहीं सकेगी।
केस दर्ज कराने के बाद जांच से लेकर आगे की कार्रवाई तक सारी सूचना मोबाइल पर एसएमएस के जरिये फरियादी को दी जाएगी। 



दुष्कर्म के मामलों में अधिकतम फांसी की सजा 



महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कानून ज्यादा संवेदनशील बनाए गए हैं। अब पीड़िता जहां चाहेगी, पुलिस को वहां बयान दर्ज करना होगा। दुष्कर्म के मामलों में न्यूनतम 10 साल से लेकर अधिकतम फांसी, जबकि सामूहिक दुष्कर्म में 20 साल से फांसी तक का प्रावधान। हालांकि फांसी का प्रावधान नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में ही होगा।