JNU में 17 दिन बाद छात्रों की भूख हड़ताल खत्म, 5 पदाधिकारियों का निष्कासन रद्द
प्रशासन और छात्र संघ के बीच बनी सहमति

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 17 दिनों से चल रही छात्र संघ की भूख हड़ताल सोमवार को खत्म हो गई। 19 अक्टूबर को प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में कई मांगों पर सहमति बनी। प्रशासन ने पांच छात्र पदाधिकारियों का निष्कासन तत्काल प्रभाव से रद्द करने और छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने पर सहमति जताई।
पांच छात्रों को मिली राहत
निष्कासन रद्द होने वालों में छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के. गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं। इन छात्रों पर पिछले साल नवंबर में डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में तोड़फोड़ और बायोमीट्रिक मशीनें उखाड़ने के आरोप लगे थे। प्रशासन ने उन्हें जुर्माने की राशि जमा करने की सलाह भी दी है।
जांच और नियमों की होगी समीक्षा
प्रदर्शन के दौरान शुरू की गई प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने पर भी सहमति बनी है। चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के नियमों की समीक्षा के लिए समिति बनाई जाएगी। इसमें छात्र संघ का प्रतिनिधि भी शामिल होगा। जेएनयू प्रवेश परीक्षा की समीक्षा के लिए भी छात्र प्रतिनिधियों वाली समिति गठित की जाएगी।
छात्रवृत्ति और हॉस्टल सुविधाओं पर फैसला
प्रशासन ने मेरिट-कम-मींस (MCM) छात्रवृत्ति में 25% बढ़ोतरी पर विचार करने की सहमति दी है। ताप्ती और माही-मांडवी हॉस्टल सहित संबंधित सुविधाओं का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाएगा। सभी हॉस्टलों में दो सप्ताह के भीतर गीजर चालू करने का निर्णय लिया गया है।
लाइब्रेरी और कैंटीन पर भी सहमति
बैठक में सीएसएलजी में कैंटीन खोलने और स्कूल लाइब्रेरी का समय रात 9 बजे तक बढ़ाने पर भी सहमति बनी। समान अवसर प्रकोष्ठ की ऑडिट रिपोर्ट एक सप्ताह में उपलब्ध कराने और छात्र संघ से चर्चा कर इसके पुनर्गठन का फैसला लिया गया। इन निर्णयों के बाद छात्र संघ ने अपनी 17 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी।


