ट्रैक पर दौड़ना था सपना, चोट के बाद थामी पिस्टल, एशियाड में साधा गोल्ड पर निशाना, कमलजीत और सुरुचि का कमाल
15 साल की उम्र में बदलना पड़ा खेल

नई दिल्ली: हरियाणा के रेवाड़ी के सुल्खा गांव के कमलजीत सिंह का सपना एथलीट बनने का था। वह स्प्रिंटर के तौर पर ट्रेनिंग कर रहे थे और भारत के लिए दौड़ना चाहते थे। लेकिन 2019 में लगी गंभीर चोट ने महज 15 साल की उम्र में उनका एथलेटिक्स करियर खत्म कर दिया। इसके बाद उन्होंने खेल छोड़ने के बजाय शूटिंग को अपना नया रास्ता बनाया।
परिवार ने बचत लगाकर दिया साथ
कमलजीत ने 2019 में पिस्टल शूटिंग शुरू की। शूटिंग महंगा खेल होने के कारण उनके सामने आर्थिक चुनौतियां भी आईं। कई बार उन्होंने खेल छोड़ने का सोचा। ऐसे समय में माता-पिता और चाचा ने अपनी बचत खर्च कर उनका साथ दिया। गांव के शूटिंग कोच ने भी उन्हें शुरुआत से तैयार किया।
जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता गोल्ड
कमलजीत ने पहले 50 मीटर पिस्टल में पहचान बनाई और बाद में 10 मीटर एयर पिस्टल में भी प्रदर्शन बेहतर किया। 2023 में उन्होंने ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद वह सीनियर स्तर पर पहुंचे और भारतीय टीम में जगह बनाई।
आखिरी समय पर मिला मौका, भारत को गोल्ड
एशियन गेम्स 2026 में कमलजीत व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में नहीं पहुंच सके। मिक्स्ड टीम इवेंट में भी वह मूल टीम का हिस्सा नहीं थे। आखिरी समय पर केदारलिंग उचागनवे की जगह उन्हें टीम में शामिल किया गया। सुरुचि सिंह के साथ उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम फाइनल में 484.6 अंक हासिल किए और गोल्ड जीता। इस प्रदर्शन के साथ नया एशियाई रिकॉर्ड भी बना। दक्षिण कोरिया ने सिल्वर और ईरान ने ब्रॉन्ज जीता।
झज्जर की हैं सुरुचि सिंह
सुरुचि सिंह हरियाणा के झज्जर की 10 मीटर एयर पिस्टल शूटर हैं। उन्होंने 13 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की थी। 2025 में उन्होंने ब्यूनस आयर्स, लीमा और म्यूनिख वर्ल्ड कप में लगातार तीन व्यक्तिगत गोल्ड जीते। दोहा वर्ल्ड कप फाइनल में उन्होंने 245.1 अंक बनाकर जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था।
ट्रैक छूटा, लेकिन शूटिंग में सोने पर निशाना
कमलजीत का एथलीट बनने का सपना चोट के कारण अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने खेल से रिश्ता नहीं तोड़ा। पिस्टल उठाने के सात साल बाद उन्होंने एशियन गेम्स में भारत के लिए गोल्ड जीता।


