Rahul Gandhi: संसद से 500 मीटर की दूरी पर छात्रों से हुई बर्बरता, राहुल गांधी ने 5 तस्वीरें दिखाकर उठाए सवाल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों की तस्वीरें दिखाईं और आरोप लगाया कि संसद से करीब 500 मीटर की दूरी पर युवाओं के साथ कथित तौर पर बर्बरता की गई। उन्होंने इस पूरे मामले की जवाबदेही केंद्र सरकार से तय करने की मांग की।
राहुल गांधी ने दिखाईं पांच तस्वीरें
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदर्शन से जुड़ी पांच तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों को पैलेट जैसी चोटें आईं, जबकि कई प्रदर्शनकारियों पर लाठी और अन्य साधनों से कार्रवाई की गई। राहुल ने कहा कि उन्होंने एक ऐसे पीड़ित से मुलाकात की, जिसकी आंख में पैलेट लगने के बाद देखने में परेशानी हो रही है। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी मुद्दा उठाया।
अमित शाह से मांगा जवाब
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली सुरक्षा एजेंसियों की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस और RAF केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अधीन आती हैं। राहुल ने दावा किया कि 25 जुलाई को उन्होंने गृह मंत्री को पत्र लिखकर दो सवाल पूछे थे क्या पैलेट गन के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई थी और प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में नजर आए लोगों की पहचान क्या थी। उनके मुताबिक, इन सवालों का अब तक जवाब नहीं मिला है।
संसद में बोलने से रोकने का लगाया आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी के मुताबिक, उनसे माफी मांगने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना है।
सरकार ने आरोपों को किया खारिज
राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली नहीं चलाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए गए थे।
गोली चलाने के आदेश पर भी सरकार का जवाब
जितेंद्र सिंह ने कहा कि जब गोली चलाई ही नहीं गई तो गोली चलाने की अनुमति देने का सवाल भी नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों में इस तरह की कार्रवाई के आदेश देने का अधिकार संबंधित मजिस्ट्रेट के पास होता है, न कि किसी मंत्री के पास। इस बयान के बाद प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
छात्रों के प्रदर्शन पर सियासत तेज
छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन से जुड़ा यह मुद्दा अब संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। राहुल गांधी ने जहां कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है, वहीं सरकार ने गोली चलाए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए आंसू गैस के इस्तेमाल की बात कही है। अब इस मामले में आगे की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।


