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प्रियंका गांधी का अमित शाह पर निशाना, बोलीं- गृह मंत्री सिर्फ वंदे मातरम गाने आए, ऐसे कैसे चलेगी संसद!

राजद सांसद संजय यादव का आरोप- बिना चर्चा विधेयक पास कराना मतदाताओं का अपमान

प्रियंका गांधी का अमित शाह पर निशाना, बोलीं- गृह मंत्री सिर्फ वंदे मातरम गाने आए, ऐसे कैसे चलेगी संसद!
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नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए। विपक्षी दल पूरे सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति का मुद्दा उठाते रहे।

प्रियंका बोलीं- सिर्फ वंदे मातरम गाने आए

मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, 'गृह मंत्री आज आए, लेकिन सिर्फ वंदे मातरम गाने। पूरा सत्र बीत गया, लेकिन न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री सदन में उपस्थित रहे। ऐसे में ये लोकतंत्र और संसद कैसे चल सकती है?'

खरगे ने सरकार पर लगाया लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'वे संसद में आने के लिए तैयार नहीं हैं। जब खुद प्रधानमंत्री हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं, जब गृह मंत्री नहीं आ रहे और ये नहीं कह रहे कि मैं अंदर था, मैं सुन रहा था- तो क्या आप यहां कमरे में बैठने आते हैं? सदन में आइए और हमारी बात सुनिए।'

खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और सांसदों का मनोबल तोड़ रही है।

जयराम रमेश ने व्यापम से की NEET की तुलना

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 11 साल में कुछ नहीं बदला। उन्होंने 2015 के व्यापम विवाद और मौजूदा NEET मुद्दे की तुलना करते हुए कहा, 'मैं आपको याद दिला दूं कि मानसून सत्र 2026 स्थगित हो गया है। लेकिन यह पहली बार नहीं हुआ है। ठीक 11 साल पहले 2015 में भी व्यापम घोटाले के कारण मानसून सत्र रद्द हो गया था। 11 साल बाद भी युवाओं से जुड़ा मुद्दा है। एक तरह से व्यापम घोटाले जैसा ही एक घोटाला 2013 में नीट में हुआ था।'

राजद ने भी केंद्र पर साधा निशाना

राजद सांसद संजय यादव ने सरकार पर संसद का समय और जनता का पैसा बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रही है। न तो सरकार और न ही प्रधानमंत्री मोदी को सकारात्मक संवाद में कोई दिलचस्पी है और न ही रचनात्मक आलोचना सुनने में। बिना किसी चर्चा और पारदर्शिता के दो मिनट में विधेयक पारित कराना, उन लाखों मतदाताओं का अपमान है, जिन्होंने इन सांसदों को देश की सर्वोच्च विधायी संस्था के लिए चुना है।'


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