Neem Karoli Baba: जब नीम करोली बाबा के एक इशारे से नदी का पानी बन गया घी, बाबा के चमत्कार से भरी है कैंची धाम की कहानी, श्रद्धालु आज भी मानते हैं अद्भुत शक्तियों का धाम
कैंची धाम से जुड़ी है गहरी आस्था

Neem Karoli Baba: देहरादून: उत्तराखंड के कैंची धाम के संत नीम करोली बाबा को करोड़ों श्रद्धालु भगवान हनुमान का भक्त और अवतार मानते हैं। बाबा का जीवन बेहद सादा था। वे अक्सर कंबल ओढ़े नजर आते थे। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग बताए जाते हैं, जिन्हें भक्त आज भी चमत्कार मानते हैं।
नदी का पानी घी बन गया
कैंची धाम में भंडारे के दौरान एक बार घी कम पड़ गया। मान्यता है कि बाबा ने सेवकों से नदी का पानी लाने को कहा। जब यह पानी कड़ाही में डाला गया तो वह घी में बदल गया। इसी घी से भंडारे का खाना तैयार हुआ। बाद में बाबा के कहने पर उतना ही घी बाजार से खरीदकर नदी में डालने की बात भी कही जाती है।
खारा पानी मीठा होने की मान्यता
एक अन्य प्रसंग में आश्रम के पास पानी का स्रोत खारा हो गया था। श्रद्धालुओं के अनुसार, बाबा ने वहां चरणामृत डालकर प्रार्थना की। इसके बाद पानी का स्वाद मीठा हो गया। भक्त इसे बाबा की सिद्धि से जोड़कर देखते हैं।
भक्त का कष्ट खुद सहने की बात
बाबा को अपने भक्तों से बेहद प्रेम था। कई कथाओं में दावा किया जाता है कि वे भक्तों की बीमारी और पीड़ा अपने ऊपर ले लेते थे। भक्त स्वस्थ होते, जबकि बाबा खुद अस्वस्थ दिखाई देते थे।
बर्फीली नदी में साधना
कहा जाता है कि बाबा कड़ाके की ठंड में भी साधना करते थे। कई श्रद्धालु उनके नदी में घंटों ध्यान लगाने के प्रसंग सुनाते हैं। इसे उनकी योग-साधना और तपस्या से जोड़कर देखा जाता है।
भक्तों को मिला जीवनदान
नीम करोली बाबा से जुड़े कई भक्तों का दावा है कि गंभीर बीमारी या संकट के समय उनके आशीर्वाद और प्रसाद से उन्हें राहत मिली। ऐसे अनुभवों ने बाबा के प्रति लोगों की आस्था को और मजबूत किया।


