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Kerala Assembly: केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग, चयन समिति के पुनर्गठन का प्रस्ताव

केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति के पुनर्गठन की मांग उठाई गई है।

Kerala Assembly: केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग, चयन समिति के पुनर्गठन का प्रस्ताव
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Kerala Assembly: केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति के पुनर्गठन की मांग उठाई गई है। सदन में पेश प्रस्ताव में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित अनियमितताओं को दूर करने और सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग भी शामिल है।

मतदाता सूची में गड़बड़ियों को दूर करने की मांग

केरल विधानसभा में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए। प्रस्ताव में कहा गया कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान यदि पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, तो ऐसी गड़बड़ियों को ठीक किया जाना चाहिए। साथ ही प्रभावित मतदाताओं के मतदान के अधिकार को बहाल करने की मांग की गई।

प्रस्ताव के समर्थकों ने मतदाता सूची में बदलाव और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना जरूरी है।

CEC को हटाने और चयन समिति बदलने की मांग

विधानसभा के प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति की संरचना में बदलाव का सुझाव दिया गया।

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति में शामिल करने की मांग की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता और संस्थागत विश्वसनीयता सुनिश्चित करना बताया गया है।

हालांकि, विधानसभा में प्रस्ताव पारित होना अपने आप मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाए जाने के बराबर नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

मतदान के अधिकार को लेकर उठाई आवाज

प्रस्ताव में मतदान के अधिकार को लोकतंत्र की बुनियादी शर्त बताते हुए कहा गया कि किसी भी पात्र मतदाता को मतदाता सूची से गलत तरीके से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। इसमें निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दिया गया।

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी बहस तेज हुई है। एक ओर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति व्यवस्था को लेकर बदलाव की मांग सामने आई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और हिरासत का मामला

निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और SIR को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। खबरों के अनुसार, 10 अक्टूबर को केरल के विपक्षी नेताओं और माकपा के अन्य नेताओं ने नई दिल्ली में केरल हाउस के पास प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने कुछ नेताओं को हिरासत में लिया।

हिरासत की कार्रवाई को लेकर केरल की ओर से विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाताओं के अधिकारों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाना जरूरी है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस

केरल विधानसभा में उठी मांगों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।


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