India China Border ITBP Underground Bunkers: अरुणाचल में चीन से फेस-ऑफ के बीच ITBP की नई तैयारी, 3 साल में हर बॉर्डर पोस्ट पर अंडरग्राउंड शेल्टर
India China Border ITBP Underground Bunkers: अरुणाचल प्रदेश में LAC पर चीन से तनाव के बीच ITBP अगले 3 साल में भूमिगत शेल्टर बनाएगी। ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक के लिए भी बड़ा बजट निर्धारित।

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना जारी रहने के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत अगले तीन वर्षों में चीन सीमा पर मौजूद बॉर्डर पोस्टों के लिए भूमिगत शेल्टर विकसित किए जाएंगे। साथ ही ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाया जाएगा, ताकि दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और जवानों की सुरक्षा बेहतर हो सके।
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने राजस्थान के अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह के दौरान बल की आधुनिकीकरण योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चीन ने सैन्य ढांचे और हथियारों के आधुनिकीकरण पर काफी निवेश किया है। ऐसे में पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहकर इस चुनौती का मुकाबला करना पर्याप्त नहीं होगा।
तीन साल में बनेंगे भूमिगत शेल्टर
ITBP प्रमुख के मुताबिक, आधुनिक युद्ध में जमीन के ऊपर बने ढांचे दुश्मन के हमलों का निशाना बन सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए चीन सीमा पर भूमिगत शेल्टर बनाने की योजना तैयार की गई है।
योजना के तहत अगले तीन वर्षों में सीमा पर जमीन के ऊपर मौजूद ढांचों के बराबर भूमिगत संरचनाएं विकसित करने का लक्ष्य है। इनका उद्देश्य गोलाबारी और हवाई हमलों जैसी परिस्थितियों में जवानों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत ITBP की सभी कंपनियों में पायलट परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। इनके जरिए भूमिगत संरचनाओं के डिजाइन और सुविधाओं का परीक्षण किया जा रहा है।
प्रस्तावित शेल्टर में वेंटिलेशन, जल निकासी और वॉशरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि जवान लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित रह सकें।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर 280 करोड़ रुपये
ITBP अब सीमा सुरक्षा में ड्रोन तकनीक की भूमिका बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है। महानिदेशक ने बताया कि बल को आधुनिकीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से 70 प्रतिशत यानी लगभग 280 करोड़ रुपये ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए निर्धारित किए गए हैं।
इसके अलावा, 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की एक अन्य आधुनिकीकरण योजना के तहत ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित करने की बात कही गई है।
ड्रोन का इस्तेमाल सीमावर्ती इलाकों में निगरानी, गतिविधियों पर नजर रखने और दुर्गम क्षेत्रों की जानकारी जुटाने में मदद कर सकता है। वहीं, एंटी-ड्रोन तकनीक संभावित दुश्मन ड्रोन के खतरे से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
हर सीमा बटालियन में ड्रोन प्लाटून
ITBP प्रमुख ने बताया कि बल की हर सीमा सुरक्षा बटालियन में एक समर्पित ड्रोन प्लाटून बनाई गई है। जवानों को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वदेशी स्तर पर ड्रोन विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक संघर्षों में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ी है। छोटे और अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन भी बड़े सैन्य ढांचे के सामने गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं। इसलिए ड्रोन और उनसे बचाव की तकनीक को अपनाना जरूरी हो गया है।
आधुनिक हथियारों और प्रशिक्षण पर भी जोर
ITBP महानिदेशक ने कहा कि बल के कुछ हथियार लगभग 50 साल पुराने हैं और उनके आधुनिकीकरण की जरूरत है। सीमा पर तैनात जवानों की क्षमताएं बढ़ाने के लिए नए उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक पर ध्यान दिया जा रहा है।
बल ने 'शौर्य कमांडो' नाम से एक नई लड़ाकू टीम भी तैयार की है। ITBP के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ जारी आमने-सामने की स्थितियों के दौरान इस टीम ने अपनी भूमिका निभाई है। इसके अलावा, 'स्ट्राइक' नाम का नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य गलवान जैसी झड़पों का सामना करने के लिए जवानों को प्रशिक्षित करना है।
अरुणाचल सीमा पर क्यों अहम है यह तैयारी?
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर अलग-अलग दावे और धारणाएं लंबे समय से तनाव का कारण रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमना-सामना होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
ऐसे में भूमिगत शेल्टर, ड्रोन निगरानी, एंटी-ड्रोन तकनीक और आधुनिक प्रशिक्षण पर ITBP का जोर सीमा प्रबंधन और जवानों की सुरक्षा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव इनके क्रियान्वयन, उपलब्ध तकनीक और सीमावर्ती परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।


