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Nagastra-2 Attack Drone: सेना को मिला स्वदेशी नागास्त्र-2 अटैक ड्रोन, 50 किमी रेंज और 650 मिमी कवच भेदने की क्षमता, जानें कैसे करता है हमला

Nagastra-2 Attack Drone: नागास्त्र-2 स्वदेशी अटैक ड्रोन की आपूर्ति शुरू। जानें इसकी 50 किमी रेंज, 60 मिनट की उड़ान क्षमता, एंटी-टैंक वॉरहेड और जैमिंग से बचाव की तकनीक।

Nagastra-2 Attack Drone: सेना को मिला स्वदेशी नागास्त्र-2 अटैक ड्रोन, 50 किमी रेंज और 650 मिमी कवच भेदने की क्षमता, जानें कैसे करता है हमला
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नई दिल्ली। भारतीय थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में स्वदेशी नागास्त्र-2 लॉइटरिंग म्यूनिशन की आपूर्ति शुरू हो गई है। नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा विकसित यह सिस्टम खास तौर पर टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक, नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में तकनीकी परीक्षण पूरे किए।

नागास्त्र-2 को आधुनिक युद्ध में इस्तेमाल होने वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन की श्रेणी में रखा जाता है। यह लक्ष्य वाले क्षेत्र में मंडराने और उसकी पहचान करने के बाद हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी घोषित विशेषताओं में 50 किलोमीटर तक की परिचालन रेंज, 60 मिनट तक हवा में रहने की क्षमता और जैमिंग से निपटने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा तकनीक शामिल हैं।

क्या है नागास्त्र-2 और कैसे करता है काम?

नागास्त्र-2 एक फिक्स्ड-विंग लॉइटरिंग म्यूनिशन है। इसे सामान्य निगरानी ड्रोन से अलग समझना जरूरी है, क्योंकि यह केवल जानकारी जुटाने के लिए नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर लक्ष्य पर हमला करने के लिए भी बनाया गया है।

यह लक्ष्य वाले क्षेत्र में कुछ समय तक मंडरा सकता है। इस दौरान इसके कैमरों से दिन और रात में निगरानी की जा सकती है। लक्ष्य की पहचान के बाद यह हमला करने में सक्षम है।

इस तरह के हथियारों को आधुनिक युद्ध में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनमें निगरानी और सटीक हमले की क्षमता एक ही सिस्टम में मिलती है।

नागास्त्र-2 की 5 प्रमुख खासियतें

50 किलोमीटर तक की रेंज

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नागास्त्र-2 की परिचालन रेंज 50 किलोमीटर तक है। इससे सेना को निर्धारित दूरी पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई का विकल्प मिलता है।

60 मिनट तक हवा में रहने की क्षमता

यह सिस्टम अधिकतम 60 मिनट तक हवा में रह सकता है। इससे लक्ष्य वाले क्षेत्र की निगरानी करने और उपयुक्त अवसर पर कार्रवाई करने की क्षमता मिलती है।

650 मिलीमीटर तक के कवच को भेदने वाला वॉरहेड

नागास्त्र-2 में 4 किलोग्राम का टैंडम शेप्ड-चार्ज वॉरहेड बताया गया है। कंपनी के अनुसार, इसे 650 मिलीमीटर तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। यह विशेषता इसे टैंक और दूसरे बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

दिन और रात में निगरानी

इसमें दिन और रात के दौरान काम करने वाले कैमरे लगे हैं। इनकी मदद से कम रोशनी वाली परिस्थितियों में भी लक्ष्य की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।

जैमिंग से निपटने की तकनीक

नागास्त्र-2 में इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता दी गई है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान सिस्टम की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखना है। अगस्त में हुए तकनीकी परीक्षणों में इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा से जुड़े मानकों का भी आकलन किया गया।

आत्मनिर्भर भारत के लिए क्यों अहम है नागास्त्र-2?

नागास्त्र-2 का विकास भारत में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। घरेलू कंपनियों की भागीदारी से सेना को अपनी जरूरतों के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने और देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

इससे पहले सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने नागास्त्र-1R की 450 यूनिट की खेप भारतीय सेना को दी थी। नागास्त्र-1R और नागास्त्र-2 अलग-अलग संस्करण हैं।

आधुनिक युद्ध में क्यों बढ़ रहा है लॉइटरिंग म्यूनिशन का महत्व?

आधुनिक संघर्षों में ड्रोन आधारित हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लॉइटरिंग म्यूनिशन निगरानी और हमले की क्षमताओं को एक साथ उपलब्ध कराते हैं। इस वजह से इन्हें पारंपरिक हथियारों के साथ इस्तेमाल किए जाने वाले एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में देखा जाता है। नागास्त्र-2 की आपूर्ति भारतीय सेना को टैंक रोधी क्षमता के लिए एक और स्वदेशी विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में कदम है।


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