CJP ने कैंसिल किया 5 सितंबर का विरोध मार्च, सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी
सरकार ने इन मामलों को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल

नई दिल्ली: नई दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने वापस लेने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से छात्रों के मुद्दों पर तीन बड़े आश्वासन दिए जाने के बाद संगठन ने यह निर्णय लिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
FIR रद्द होंगी, नई कार्रवाई नहीं
केंद्र ने भरोसा दिया है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की कार्रवाई होगी। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में आगे नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। दिल्ली पुलिस ने 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाने की बात कही है। सरकार ने इन मामलों को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल की भी मांग की है।
2,873 लोगों को लेकर अलग मांग
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR रद्द करने के साथ 2,873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। सरकार का कहना है कि इनमें आपराधिक इतिहास वाले लोग भी शामिल हैं। इसी तरह बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल से भी आवेदन आने की बात अदालत में कही गई।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा
सरकार ने प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का भरोसा भी दिया है। तुषार मेहता ने कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया तैयार करने में तीन महीने लग सकते हैं और इस अवधि में भुगतान भी किया जाएगा।
CJP ने सरकार के रुख की तारीफ की
CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने अदालत में मार्च वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने सरकार के सकारात्मक रुख और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भरोसा जताया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि दोनों पक्ष सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें तो हर मुद्दे का समाधान संभव है।
20 जून से शुरू हुआ था आंदोलन
NEET में कथित अनियमितताओं के खिलाफ CJP का आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। 20 जुलाई को संसद मार्च की कोशिश के दौरान पुलिस से झड़प हुई थी। इसके बाद 25 जुलाई को आंदोलन खत्म किया गया था।


