मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 2 करोड़ रिश्वत मांगने का आरोप, केरल सरकार ने 20 साल पुराने मामले में जांच को दी मंजूरी
SIR विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केरल सरकार ने उनके खिलाफ करीब 20 साल पुराने कथित रिश्वत मामले में विजिलेंस जांच को मंजूरी दे दी है। आरोप है कि 2006 में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव रहते हुए उन्होंने सड़क निर्माण परियोजना के बिलों का भुगतान कराने के बदले 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी थी। फिलहाल विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) मामले की शुरुआती जांच करेगा।
ठेकेदार की शिकायत पर जांच शुरू
यह मामला केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इसके तहत मेन सेंट्रल रोड के निर्माण और सुधार का काम भारत-मलेशिया की संयुक्त कंपनी PATI-BEL को मिला था। ठेकेदार साजन का आरोप है कि करीब 17 करोड़ रुपए के बिल मंजूर होने के बावजूद भुगतान रोक दिया गया था। इसके बदले ज्ञानेश कुमार ने 2 करोड़ रुपए मांगे थे।
पहले भी हो चुकी है जांच
इस मामले में 2006-07 के दौरान विजिलेंस जांच हुई थी, लेकिन पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण इसे बंद कर दिया गया। अब साजन ने नई शिकायत देकर जांच दोबारा शुरू करने की मांग की है। आरोपों की पुष्टि होने पर FIR दर्ज हो सकती है।
SIR विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के नेता ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। हालांकि, रिश्वत के आरोपों की अभी जांच होनी बाकी है और इन्हें साबित नहीं माना जा सकता।


