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Banke Bihari Temple: बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, दान का एक-एक पैसा मंदिर के खजाने में जाएगा

अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि भक्तों की ओर से दिया गया हर दान सीधे मंदिर की दानपेटी या आधिकारिक ऑनलाइन ट्रेजरी में जमा होना चाहिए।

Banke Bihari Temple: बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, दान का एक-एक पैसा मंदिर के खजाने में जाएगा
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नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि भक्तों की ओर से दिया गया हर दान सीधे मंदिर की दानपेटी या आधिकारिक ऑनलाइन ट्रेजरी में जमा होना चाहिए। किसी सेवायत या अन्य व्यक्ति की ओर से दान राशि को बीच में लेने या रोकने की कोशिश को अदालत ने गंभीरता से लेने की बात कही है। साथ ही मंदिर की प्रबंध समिति को दान के संग्रह और लेखे-जोखे के लिए एक पारदर्शी तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया गया।

दान राशि को लेकर सामने आई थी गंभीर शिकायत

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंदिर के कामकाज की निगरानी के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में कथित तौर पर ऐसे मामलों की जानकारी दी गई, जहां कुछ लोग दानपेटी के सामने खड़े होकर भक्तों से सीधे चढ़ावा लेते नजर आए। अदालत के सामने इस संबंध में तस्वीरें और वीडियो भी पेश किए गए।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ दानपेटियों के मुंह को फूल, प्लेट या दूसरी वस्तुओं से ढक दिया जाता था और ऑनलाइन दान के लिए लगाए गए कुछ QR कोड को हटाने या ढकने की शिकायत भी सामने आई। इन दावों पर अदालत ने मंदिर की आय और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंता जताई।

पहले भगवान को समर्पित होगा दान, उसके बाद ही हिस्सा

सुनवाई के दौरान सेवायतों की ओर से दान राशि पर अपने पारंपरिक अधिकार का तर्क भी रखा गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भक्त की ओर से दिया गया पैसा पहले देवता को अर्पित होना चाहिए, उसके बाद ही किसी सेवायत या भंडारी को नियमों के अनुसार मिलने वाले हिस्से की बात आती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई पुजारी या सेवायत देवता को समर्पित होने से पहले उस राशि पर अपना अधिकार नहीं जता सकता।

मंदिर प्रबंधन को बनानी होगी पारदर्शी व्यवस्था

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंदिर की प्रबंध समिति को दान प्राप्त करने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि भक्तों की ओर से दिए गए धन का रिकॉर्ड स्पष्ट होना चाहिए और पूरी राशि मंदिर की आधिकारिक व्यवस्था के जरिए ही खजाने तक पहुंचनी चाहिए।

मंदिर प्रबंधन विवाद भी बना हुआ है बड़ा मुद्दा

बांके बिहारी मंदिर का यह मामला केवल दान व्यवस्था तक सीमित नहीं है। मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन और राज्य की भूमिका को लेकर भी लंबे समय से विवाद चल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में मंदिर प्रबंधन के लिए अलग कानूनी ढांचा तैयार करने की कोशिश की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इससे जुड़े मामले पहुंचे। अगस्त 2025 में शीर्ष अदालत ने मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की निगरानी के लिए हाई-पावर्ड कमेटी गठित की थी।

मंदिर की संपत्ति और विकास पर भी अदालत की नजर

सुनवाई के दौरान मंदिर के फंड से संपत्ति खरीदने और विकास कार्यों पर खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए। अदालत के समक्ष मंदिर निधि के संभावित इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई और यह मुद्दा उठा कि प्रबंध समिति की शक्तियों की सीमा क्या होनी चाहिए। संबंधित पक्षों को जवाब और आपत्तियां दाखिल करने के लिए समय दिया गया है।

भक्तों के चढ़ावे की सुरक्षा पर SC का स्पष्ट संदेश

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का सीधा असर मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था पर पड़ेगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि भक्तों का पैसा पहले मंदिर के आधिकारिक कोष तक पहुंचना चाहिए, उसके बाद ही किसी अन्य भुगतान या हिस्सेदारी का सवाल आएगा। इससे दान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


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