सोन नदी के पानी पर बिहार-झारखंड में समझौता, 25 साल पुराना विवाद खत्म; दोनों राज्यों को मिलेगा हिस्सा
समझौते के तहत कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी में से बिहार को ...

रांची। सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच करीब 25 साल से चला आ रहा विवाद खत्म हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी। समझौते के तहत कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी में से बिहार को 5.57 MAF और झारखंड को 2 MAF पानी मिलेगा।
लाखों किसानों को मिलेगा फायदा
अमित शाह ने कहा कि समझौते से बिहार और झारखंड के बड़े ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। साथ ही कई इलाकों में पीने के पानी की समस्या भी दूर होगी। उन्होंने इसे सहकारी संघवाद और ‘टीम इंडिया’ की भावना का उदाहरण बताया।
बिहार के इन जिलों को मिलेगा लाभ
समझौते से भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना समेत बिहार के कई इलाकों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी। झारखंड के पलामू, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी तथा माननीय गृह मंत्री श्री @AmitShah जी का आभार।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) August 31, 2026
26 वर्षों से लंबित विवाद का अंत, बिहार के हित में ऐतिहासिक समाधान!
बिहार और झारखंड के बीच सोन नद के जल बंटवारे से जुड़े 26 वर्षों के पुराने विवाद का समाधान हो गया। आज नई दिल्ली में माननीय… pic.twitter.com/Udmz2hvzfc
1973 के समझौते से शुरू हुआ विवाद
सोन नदी के पानी का विवाद 1973 में हुए बाणसागर परियोजना समझौते से जुड़ा है। उस समय मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच समझौता हुआ था। बिहार को 7.75 MAF पानी आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद उसने पानी में अपनी हिस्सेदारी की मांग शुरू की।
इंद्रपुरी परियोजना भी अटकी थी
झारखंड का तर्क था कि सोन नदी का उद्गम और बड़ा कैचमेंट उसके क्षेत्र में है, इसलिए उसे पानी में हिस्सा मिलना चाहिए। वहीं बिहार 1973 के समझौते के आधार पर पूरा हिस्सा मांगता रहा। विवाद के कारण बिहार की इंद्रपुरी जलाशय परियोजना भी लंबे समय से अटकी थी। अब समझौते से परियोजना और सिंचाई व्यवस्था को आगे बढ़ने की उम्मीद है।


