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MP Mohan Cabinet : मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले, RGPV के तीन नए विश्वविद्यालयों में बंटवारा; 41 हजार करोड़ की योजनाओं को मंजूरी

बैठक में प्रदेश के विकास, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, डेयरी, कृषि और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।

MP Mohan Cabinet : मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले, RGPV के तीन नए विश्वविद्यालयों में बंटवारा; 41 हजार करोड़ की योजनाओं को मंजूरी
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MP Mohan Cabinet: भोपाल। भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक संपन्न हो गई है। बैठक में प्रदेश के विकास, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, डेयरी, कृषि और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। सरकार की ओर से करीब 41 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं के क्रियान्वयन को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

RGPV अब तीन हिस्सों में होगा विभाजित

कैबिनेट बैठक में तकनीकी शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी RGPV को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों में विभाजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय का मुख्यालय भोपाल, महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय का मुख्यालय जबलपुर और मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय का मुख्यालय उज्जैन में होगा।

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक मौजूदा RGPV को मध्य भारत क्षेत्र के विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बदलाव के जरिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।

मूंग खरीदी की सीमा 25 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत

किसानों के लिए भी कैबिनेट में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सरकार अब किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग की कुल पैदावार का 60 प्रतिशत तक हिस्सा समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीदेगी। इससे पहले खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत निर्धारित थी। सीमा बढ़ाए जाने से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

डेयरी सेक्टर के लिए करीब 2,973 करोड़ रुपये मंजूर

कैबिनेट ने दुग्ध उत्पादकों और डेयरी क्षेत्र के विस्तार के लिए करीब 2,973 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इसमें दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए 1,547 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक करने का लक्ष्य रखा है।

इसके साथ ही दूध संकलन क्षमता को 12 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन और प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है। दुग्ध पैकेट की बिक्री क्षमता को भी 7 लाख से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।

बीना-खिमलासा मार्ग को फोरलेन बनाने की मंजूरी

सड़क और बुनियादी ढांचे को लेकर भी कैबिनेट ने कई फैसले लिए। महलुआ-बीना-खेमला-सामलथौन मार्ग को फोरलेन में अपग्रेड करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 2,776 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

वहीं पश्चिमी भोपाल बाईपास परियोजना की लागत बढ़कर करीब 3,225 करोड़ रुपये हो गई है। मुआवजा गुणांक में बढ़ोतरी के कारण परियोजना की लागत में इजाफा हुआ है। रातापानी टाइगर रिजर्व में अंडरपास बनाए जाने के चलते बाईपास की लंबाई भी कम की जाएगी।

स्वास्थ्य और आयुष विभाग में पदों को मंजूरी

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की संपत्तियों के संधारण के लिए करीब 915.77 करोड़ रुपये और मशीनरी एवं उपकरणों के अनुरक्षण के लिए 488.41 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं नवगठित जिलों में आयुष विभाग के जिला कार्यालयों के लिए 20 पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई है।

हर जिले में शिकायतों के लिए लोकपाल नियुक्त होंगे

सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक जिले में शिकायतों के निराकरण के लिए लोकपाल नियुक्त करने का फैसला किया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तीय व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

11 सितंबर को होगा अगला जन विश्वास सप्ताह

कैबिनेट बैठक में जन विश्वास अभियान को लेकर भी निर्णय लिया गया। दो दिवसीय जन्माष्टमी पर्व के चलते अगला जन विश्वास सप्ताह अब 11 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों के समाधान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देना है।

लापरवाही और अनुशासनहीनता पर भी कार्रवाई

बैठक में कुछ अनुशासनात्मक मामलों पर भी निर्णय लिए गए। बच्चों के पलायन से जुड़े मामले में दोषी पाए गए अधिकारी की पेंशन में एक वर्ष तक पांच प्रतिशत की कटौती का फैसला किया गया। वहीं रिश्वत के मामले में दोषसिद्ध सेवानिवृत्त पूर्व उप वन क्षेत्रपाल की संपूर्ण पेंशन स्थायी रूप से रोकने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।


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