महाकाल की अंतिम राजसी सवारी: सिंधिया करेंगे पगड़ी भेंट, 250 साल पुरानी परंपरा निभाएंगे; रात में क्यों नहीं रुकते ज्योतिरादित्य ने खुद बताई वजह!
सिंधिया परिवार का कोई न कोई सदस्य महाकाल की सवारी में शामिल होता रहा है।

उज्जैन: उज्जैन में सोमवार को भगवान महाकालेश्वर की भादौं मास की अंतिम राजसी सवारी निकाली जा रही है। सवारी को लेकर शहर में लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर सुबह 6 बजे से ही सवारी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई। मंदिर और पूरे सवारी मार्ग पर पुलिस की कड़ी व्यवस्था की गई है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया होंगे शामिल
राजसी सवारी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे। वे सिंधिया राजघराने की करीब ढाई सौ साल पुरानी परंपरा के तहत भगवान महाकाल को पगड़ी भेंट करेंगे। सिंधिया परिवार का कोई न कोई सदस्य महाकाल की सवारी में शामिल होता रहा है।
उज्जैन के एक ही महाराज- महाकाल
श्रावण और भादौं में निकलने वाली महाकाल की सवारी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि महाराजाधिराज महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण करते हैं। सोमवार सुबह मंदिर में भस्म आरती के बाद ज्योतिर्लिंग का विशेष श्रृंगार किया गया।
सिंधिया परिवार ने बनवाया था मंदिर
इतिहास के अनुसार पुराने महाकाल मंदिर के नष्ट होने के बाद करीब 500 साल बाद सिंधिया राजपरिवार ने इसका पुनर्निर्माण कराया। रानोजी सिंधिया ने उज्जैन में मंदिर की दुर्दशा देखकर इसके निर्माण का आदेश दिया था। बाद में ज्योतिर्लिंग को कुंड से निकालकर विधिवत मंदिर में स्थापित कराया गया।
सिंधिया परिवार रात में क्यों नहीं रुकता?
सिंधिया परिवार की परंपरा रही है कि उनका कोई सदस्य उज्जैन में रात नहीं रुकता। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस परंपरा का पालन करते हैं। उनके मुताबिक, पूर्वजों ने तय किया था कि उज्जैन के एकमात्र महाराज भगवान महाकाल हैं। इसी मान्यता के कारण सिंधिया परिवार रात में शहर में नहीं रुकता।


