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Bada Ganpati Mandir : 25 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा का अनोखा मंदिर, जानें क्यों कहलाते हैं ‘बड़ा गणपति’; छिपी हैं कई रोचक मान्यताएं

भगवान गणेश की भक्ति और आस्था के लिए प्रसिद्ध मध्य प्रदेश का इंदौर शहर अपने ऐतिहासिक बड़ा गणपति मंदिर के लिए भी जाना जाता है। गणेश उत्सव के दौरान इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है।

Bada Ganpati Mandir : 25 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा का अनोखा मंदिर, जानें क्यों कहलाते हैं ‘बड़ा गणपति’; छिपी हैं कई रोचक मान्यताएं
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Indore Bada Ganpati Temple: इंदौर। भगवान गणेश की भक्ति और आस्था के लिए प्रसिद्ध मध्य प्रदेश का इंदौर शहर अपने ऐतिहासिक बड़ा गणपति मंदिर के लिए भी जाना जाता है। गणेश उत्सव के दौरान इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। यहां स्थापित भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहती है। करीब 25 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा के कारण ही इस मंदिर को ‘बड़ा गणपति’ के नाम से प्रसिद्धि मिली है।

सुभाषचंद्र मार्ग पर स्थित है ऐतिहासिक मंदिर

इंदौर के सुभाषचंद्र मार्ग पर स्थित बड़ा गणपति मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा को देखने के लिए सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन गणेश उत्सव के समय यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1875 में शुरू हुआ था और लगभग तीन वर्षों में इसे पूरा किया गया। विशाल प्रतिमा और इसकी विशेष बनावट इसे अन्य गणेश मंदिरों से अलग पहचान देती है।

25 फीट ऊंची है बप्पा की भव्य प्रतिमा

मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा करीब 25 फीट ऊंची है और इसे लगभग 14 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित किया गया है। प्रतिमा का स्वरूप सिंदूरी रंग का है, जो भक्तों को आकर्षित करता है। बताया जाता है कि इस विशाल प्रतिमा का निर्माण राजस्थान के कुशल कारीगरों ने किया था।

प्रतिमा निर्माण से जुड़ी हैं खास मान्यताएं

बड़ा गणपति मंदिर की प्रतिमा केवल अपने आकार के कारण ही नहीं, बल्कि इसके निर्माण से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी विशेष मानी जाती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिमा के निर्माण के लिए देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे उज्जैन, अयोध्या, मथुरा और वाराणसी से मिट्टी और जल लाया गया था। इसके अलावा प्रतिमा निर्माण में सोना, चांदी, नवरत्न और अष्टधातु जैसी सामग्री के इस्तेमाल की भी मान्यता है।




सपने में भगवान गणेश के दर्शन की मान्यता

मंदिर की स्थापना को लेकर एक रोचक कथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि उज्जैन के दाधीच परिवार के मुखिया को भगवान गणेश ने सपने में दर्शन दिए थे। इसके बाद उनके मन में भगवान गणेश का भव्य मंदिर बनाने की इच्छा जागी और इसी प्रेरणा से वर्ष 1875 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ।

साल में चार बार बदला जाता है बप्पा का चोला

बड़ा गणपति मंदिर में भगवान गणेश को विशेष चोला चढ़ाने की परंपरा भी काफी प्रसिद्ध है। मान्यता के अनुसार, साल में चार बार बप्पा का चोला बदला जाता है। विशाल प्रतिमा होने के कारण इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। बताया जाता है कि चोला चढ़ाने के लिए करीब 15 किलो घी और 25 किलो सिंदूर का इस्तेमाल किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 15 दिन का समय लग जाता है।

गणेश उत्सव में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

गणेश उत्सव के दौरान बड़ा गणपति मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। दूर-दूर से श्रद्धालु विशाल गणेश प्रतिमा के दर्शन करने पहुंचते हैं।भक्त भगवान गणेश को लड्डू, मोदक, पेड़े और अन्य मिठाइयों का भोग लगाते हैं। फूलों से बप्पा का विशेष श्रृंगार किया जाता है। आस्था और भव्यता का यह संगम बड़ा गणपति मंदिर को इंदौर की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा बनाता है।


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