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भोपाल में दिखी मां की ममता, बेटे को किडनी देकर दिया नया जीवन

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पहली बार दूरबीन तकनीक का उपयोग करके किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। इस प्रक्रिया में मां ने अपने 24 साल के बेटे को किडनी डोनेट की।

भोपाल में दिखी मां की ममता, बेटे को किडनी देकर दिया नया जीवन
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भोपाल। हमीदिया अस्पताल में इलाज में एक और तकनीक जुड़ गई। यहां पहली बार दूरबीन तकनीक से किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया। मां ने अपने 24 साल के बेटे को किडनी डोनेट की। लेप्रोस्कोपिक नेफ्रेक्टॉमी यानी होल सर्जरी से यह ट्रांसप्लांट हुआ। इस तकनीक में दर्द अपेक्षाकृत कम होता है। चिकित्सकों ने बताया कि मरीज और डोनर दोनों ही रिकवर कर रहे हैं। 28 साल के मोहन कुमार लंबे समय से किडनी की परेशानी से जूझ रहे थे।


उन्हें हायपर टेंशन के उपचार के दौरान किडनी में परेशानी की जानकारी मिली। लगातार इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुए। और एक साल पहले डायलिसिस पर शिट हो गए। डायलिसिस के बावजूद मरीज की परेशानी बढ़ रही थी ऐसे में डॉक्टरों ने उसे ट्रांसप्लांट की सलाह दी। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मां अनीता का ब्लड ग्रुप मोहन से मैच हुआ। मां की सहमति के बाद किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारियां की गई। बताया जाता है कि मां अनिता हमीदिया में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं।

ट्रांसप्लांट में किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु शर्मा के साथ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरआर बर्डे, प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. सौरभ जैन, डॉ. अमित जैन, डॉ. समीर व्यास, डॉ. नरेन्द्र कुर्मी, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ बृजेश कौशल, डॉ श्वेता श्रीवास्तव के साथ टीम शामिल थी।हमीदिया अस्पताल के यूरोसर्जन डॉ. अमित जैन ने बताया कि की होल सर्जरी से किडनी निकालना डॉक्टरों के लिए थोड़ा कठिन होता है, लेकिन इसमें मरीज को आराम रहता है। ओपन सर्जरी में डोनर को करीब 25 सेंटीमीटर लंबा कट लगाना पड़ता है, लेकिन की होल सर्जरी में महज पांच सेमी का चीरा लगाया जाता है। इससे डोनर की किडनी निकाली गई।

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