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UP सरकार का बड़ा फैसला, सभी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक; नई पंचायतों के गठन तक संभालेंगे जिम्मेदारी

Dev Verma
UP सरकार का बड़ा फैसला, सभी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक; नई पंचायतों के गठन तक संभालेंगे जिम्मेदारी
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UP : लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों के संचालन को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य में वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव के बाद गठित सभी जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को समाप्त हो गया है। ऐसे में सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सभी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है। ये व्यवस्था नई जिला पंचायतों के गठन या अधिकतम छह महीने की अवधि तक प्रभावी रहेगी।

UP : डीएम करेंगे प्रशासकों की नियुक्ति

शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार संबंधित जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में नामित करेंगे। इस दौरान उनका दायित्व केवल नियमित प्रशासनिक और विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना होगा, ताकि पंचायत स्तर पर सरकारी कार्य प्रभावित न हों।

UP : नीतिगत फैसलों पर रहेगी रोक

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक के रूप में कार्यरत जिला पंचायत अध्यक्ष किसी भी प्रकार के नए नीतिगत या वित्तीय महत्व के निर्णय नहीं ले सकेंगे। यदि किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा निर्णय आवश्यक होगा, तो उसका प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जाएगा। शासन की मंजूरी मिलने के बाद ही उस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

UP : कानूनी प्रावधानों के तहत लिया गया निर्णय

राज्य सरकार ने यह कदम उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत उठाया है। सरकार का कहना है कि नई पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का व्यवधान न आए और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन लगातार जारी रहे, इसी उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।

UP : हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिर चर्चा में पंचायत प्रशासन

यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाए जाने के सरकारी निर्णय पर सवाल उठाए थे। अदालत ने उस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे असंवैधानिक बताया था। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भी सरकार की आलोचना की थी। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का नया निर्णय अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लिया गया है, जिस पर अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।


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