EU Joins Operation Economic Outcast: तेहरान की वित्तीय लाइफलाइन काटने में EU भी हुआ शामिल, कैसे निपटेगा ईरान...सामने आया अपडेट
EU Joins Operation Economic Outcast: ईरान के खिलाफ अमेरिका के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ में EU भी शामिल हो गया है। अमेरिका और यूरोप तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ कूटनीति और होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही पर जोर दे रहे हैं।

EU Joins Operation Economic Outcast: वॉशिंगटन डीसी। ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक कार्रवाई को अब यूरोपीय संघ का भी समर्थन मिल गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ में शामिल हो गया है।
बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर EU के रुख का स्वागत करते हुए कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरानी सरकार वैश्विक वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल अपने परमाणु लक्ष्यों, हथियार कार्यक्रमों और आतंकवादी प्रॉक्सी को फंड करने के लिए न कर सके। दुनिया ईरान को स्पष्ट संदेश दे रही है कि आर्थिक दबाव तब तक जारी रहेगा, जब तक उसकी बची हुई वित्तीय लाइफलाइन को खत्म नहीं कर दिया जाता।
ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के पक्ष में EU
EU ने अपने बयान में कहा कि उसने पहले ही ईरान के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध लागू किए हैं। इनका उद्देश्य तेहरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल उन गतिविधियों के लिए करने से रोकना है, जिन्हें यूरोपीय संघ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
EU ने ईरान से अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग दोहराई है। इसके अलावा ब्लॉक ने क्षेत्र और यूरोप में अस्थिर करने वाली गतिविधियों से दूर रहने, रूस के यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को सैन्य समर्थन देना बंद करने तथा ईरान के भीतर हिंसा और दमन रोकने का भी आह्वान किया।
EU ने संकेत दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने को तैयार है। इसमें ईरान पर और आर्थिक दबाव डालने के उपाय भी शामिल हो सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी EU की चिंता
ईरान पर आर्थिक दबाव के साथ-साथ यूरोपीय संघ ने कूटनीति और तनाव कम करने पर भी जोर दिया है। EU का कहना है कि क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने और शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रहना जरूरी है।
खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना EU की प्राथमिकताओं में शामिल है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
EU ने कहा कि वह अमेरिका, G7 देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान पर दबाव बनाए रखने के साथ-साथ तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देने की कोशिश जारी रखेगा।
क्या है ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने पिछले महीने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू करने का ऐलान किया था। अमेरिका के मुताबिक इसका उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से अलग करना और उसकी आय के उन स्रोतों पर कार्रवाई करना है, जिनसे ईरानी सरकार को आर्थिक समर्थन मिलता है।
बेसेंट ने इसे ईरान और उसके आसपास के क्षेत्र से जुड़े आर्थिक नेटवर्क के खिलाफ एक अभूतपूर्व अभियान बताया था। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक ईरान तेल की बिक्री, शिपिंग और प्रतिबंधों से बचने के लिए कई नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। वॉशिंगटन अब ऐसे नेटवर्क की पहचान कर उन पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डिजिटल एसेट और शिपिंग नेटवर्क भी निशाने पर
अमेरिकी अभियान के तहत ईरान से जुड़ी उन गतिविधियों की श्रेणी भी बढ़ाई गई है, जिन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इनमें डिजिटल एसेट, टेक्नोलॉजी और शिपिंग से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं।
अमेरिका का उद्देश्य केवल पारंपरिक बैंकिंग नेटवर्क पर दबाव डालना नहीं, बल्कि ईरान की आय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े व्यापक नेटवर्क को प्रभावित करना है।
बेसेंट ने ईरान के सामने दो विकल्प बताए थे, एक तरफ वैश्विक आर्थिक अलगाव और कमजोर अर्थव्यवस्था, जबकि दूसरी तरफ सामान्य आर्थिक संबंधों की ओर लौटने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोबारा शामिल होने का रास्ता।
अमेरिका और EU की रणनीति में क्या दिख रहा है?
EU के ताजा रुख से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन और यूरोप ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के मुद्दे पर करीब आ रहे हैं। हालांकि यूरोपीय संघ केवल प्रतिबंधों और आर्थिक कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय कूटनीतिक समाधान और तनाव कम करने पर भी जोर दे रहा है।
ऐसे में ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक रणनीति को यूरोपीय समर्थन मिलने से तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। खासकर ऊर्जा, शिपिंग, वित्तीय नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के रास्तों पर संभावित कार्रवाई का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


