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india-uk-ceta-agreement: भारत-ब्रिटेन CETA 15 जुलाई से लागू, 99% भारतीय निर्यात को ड्यूटी-फ्री पहुंच, ब्रिटिश कारें और प्रीमियम शराब होंगी सस्ती

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सरकार का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

india-uk-ceta-agreement : नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच 25 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (india-uk-ceta-agreement) बुधवार, 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन के बाजार में 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जबकि भारत कई ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क में चरणबद्ध ढील देगा। सरकार का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


ऑटो सेक्टर में ऐतिहासिक टैरिफ कटौती-

समझौते के तहत भारत ने पहली बार किसी मुक्त व्यापार समझौते में पूरी तरह निर्मित (CBU) विदेशी पैसेंजर कारों और ट्रकों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती को मंजूरी दी है। ब्रिटिश कारों पर वर्तमान 110 प्रतिशत आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों पर यह राहत तत्काल प्रभाव से लागू होगी, जबकि घरेलू ऑटो उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक (EV), हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों पर यह छूट छठे वर्ष से लागू होगी। इसके बदले ब्रिटेन भारतीय इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपने बाजार में प्राथमिकता के आधार पर तरजीही प्रवेश देगा।


प्रीमियम विदेशी शराब होगी सस्ती-

समझौते के लागू होने के साथ भारत में प्रीमियम विदेशी शराब के आयात पर भी शुल्क में कमी आएगी। स्कॉच व्हिस्की, बॉर्बन, वोडका, जिन, रम और टकीला जैसी शराब पर आयात शुल्क पहले वर्ष में 150 प्रतिशत से घटकर 110 प्रतिशत हो जाएगा। अगले 10 वर्षों में इसे घटाकर 75 प्रतिशत तक लाया जाएगा। वहीं, स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 10 वर्षों में घटकर 40 प्रतिशत रह जाएगा। हालांकि, यह रियायत केवल उन ब्रांडों को मिलेगी जो निर्धारित न्यूनतम मूल्य की शर्तों को पूरा करेंगे।


भारतीय निर्यातकों और आईटी सेक्टर को मिलेगा लाभ-

इस समझौते से भारत के श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। कपड़ा, टेक्सटाइल, जूते, प्रोसेस्ड फूड, हस्तशिल्प और समुद्री उत्पादों सहित कई वस्तुओं का निर्यात अब ब्रिटेन में बिना किसी कस्टम ड्यूटी के किया जा सकेगा। पहले इन उत्पादों पर 4 से 16 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। सेवा क्षेत्र, विशेषकर आईटी उद्योग के लिए भी यह समझौता लाभकारी माना जा रहा है। ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ के तहत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय कर्मचारियों के लिए भारतीय कंपनियों को पांच वर्षों तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान (सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन) नहीं देना होगा। इसके अलावा भारतीय कंपनियों को ब्रिटिश सरकार के लगभग 40 हजार बड़े सरकारी ठेकों में बोली लगाने का अवसर भी मिलेगा।


संवेदनशील उत्पादों को मिली सुरक्षा-

घरेलू उद्योग और किसानों के हितों की रक्षा के लिए समझौते में सेब, अखरोट, गोल्ड बार और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा गया है। साथ ही भारत ने दवाओं के पेटेंट की अवधि बढ़ाने की ब्रिटेन की मांग स्वीकार नहीं की, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में सस्ती जेनेरिक दवाओं के उत्पादन का अधिकार सुरक्षित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों को नई दिशा देगा। हालांकि, स्टील निर्यात से जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर उद्योग जगत में अभी भी आशंकाएं बनी हुई हैं।


FAQ

Q1. भारत-ब्रिटेन CETA क्या है?
A. CETA (Comprehensive Economic and Trade Agreement) भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक मुक्त व्यापार समझौता है, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश और सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।

Q2. यह समझौता कब से लागू हुआ?
A. यह समझौता 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया।

Q3. भारतीय निर्यातकों को सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?
A. ब्रिटेन में 99% भारतीय निर्यात को ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) बाजार पहुंच मिलेगी, जिससे कपड़ा, जूते, हस्तशिल्प, प्रोसेस्ड फूड और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा।

Q4. ब्रिटिश कारों पर क्या असर पड़ेगा?
A. ब्रिटिश कारों पर 110% आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% किया जाएगा। पेट्रोल-डीजल कारों पर राहत तुरंत लागू होगी, जबकि EV, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों पर छूट छठे वर्ष से मिलेगी।

Q5. क्या विदेशी शराब सस्ती होगी?
A. हां। स्कॉच व्हिस्की, वोडका, जिन, रम, टकीला और अन्य प्रीमियम विदेशी शराब पर आयात शुल्क में चरणबद्ध कमी होगी। स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क 10 वर्षों में 40% तक आ जाएगा।

Q6. आईटी और सेवा क्षेत्र को क्या लाभ मिलेगा?
A. ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय कर्मचारियों के लिए भारतीय कंपनियों को पांच वर्षों तक सोशल सिक्योरिटी अंशदान नहीं देना होगा। साथ ही ब्रिटेन के लगभग 40,000 सरकारी ठेकों में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

Q7. किन भारतीय उद्योगों को सबसे अधिक फायदा होने की संभावना है?
A. टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फुटवियर, हस्तशिल्प, प्रोसेस्ड फूड, समुद्री उत्पाद और आईटी/सेवा क्षेत्र को प्रमुख लाभ मिलने की उम्मीद है।

Q8. किन उत्पादों को टैरिफ रियायत से बाहर रखा गया है?
A. सेब, अखरोट, गोल्ड बार और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा गया है।

Q9. दवा उद्योग पर इस समझौते का क्या प्रभाव होगा?
A. भारत ने दवाओं के पेटेंट की अवधि बढ़ाने की ब्रिटेन की मांग स्वीकार नहीं की है, जिससे सस्ती जेनेरिक दवाओं के उत्पादन का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

Q10. क्या इस समझौते को लेकर कोई चिंता भी है?
A. हां। विशेषज्ञों के अनुसार स्टील निर्यात से जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर उद्योग जगत में अभी भी कुछ आशंकाएं बनी हुई हैं।

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