Top
Begin typing your search above and press enter to search.

Dhanteras 2026 : धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा? समुद्र मंथन से जुड़ी है अमृत कलश की यह पौराणिक कथा

समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, तभी से धनतेरस पर उनकी पूजा कर आरोग्य, सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना की जाती है।

Dhanteras 2026 : धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा? समुद्र मंथन से जुड़ी है अमृत कलश की यह पौराणिक कथा
X

Dhanteras 2026 : धर्म डेस्क। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी के साथ भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है और इस पर्व का समुद्र मंथन से क्या संबंध है? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसकी कहानी अमृत कलश और भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जुड़ी हुई है।

कौन हैं भगवान धन्वंतरि और क्यों होती है उनकी पूजा?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उन्हें आयुर्वेद का जनक एवं आरोग्य का देवता भी कहा जाता है। मान्यता है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनके हाथों में मौजूद अमृत कलश जीवन, स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के कारण धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। भक्त उनसे अपने परिवार की अच्छी सेहत, निरोगी जीवन और लंबी आयु की कामना करते हैं। यह पर्व संदेश देता है कि जीवन में धन-संपत्ति के साथ अच्छा स्वास्थ्य भी सबसे बड़ी संपत्ति है।

क्या है समुद्र मंथन की पौराणिक कथा?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय देवताओं की शक्ति कमजोर पड़ने लगी थी और असुरों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा था। इस समस्या से परेशान होकर देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब भगवान विष्णु ने उन्हें क्षीरसागर का मंथन करने और उससे निकलने वाले अमृत को प्राप्त करने की सलाह दी। अमृत प्राप्त करने के लिए देवताओं और असुरों ने आपस में मिलकर समुद्र मंथन करने का निर्णय लिया। इसके लिए मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकि को रस्सी बनाया गया। मंथन के दौरान पर्वत समुद्र में न डूबे, इसके लिए भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण कर उसे अपनी पीठ पर धारण किया।

समुद्र मंथन से निकले थे कई दिव्य रत्न

समुद्र मंथन के दौरान एक के बाद एक कई दिव्य वस्तुएं और रत्न प्रकट हुए। धार्मिक ग्रंथों में माता लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, उच्चैःश्रवा घोड़ा, कौस्तुभ मणि समेत अनेक दिव्य रत्नों के प्रकट होने का उल्लेख मिलता है।इसी दौरान समुद्र से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण कर लिया था। इस कारण उन्हें नीलकंठ नाम भी मिला।

अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि

समुद्र मंथन की प्रक्रिया के अंतिम चरण में भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए। उनके हाथों में अमृत कलश देखकर देवताओं और असुरों के बीच उसे प्राप्त करने की होड़ मच गई। इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और अपनी लीला से अमृत का वितरण देवताओं के पक्ष में कराया। इस तरह देवताओं को अमृत प्राप्त हुआ और उनकी शक्ति पुनः स्थापित हुई।

धनतेरस का असली संदेश क्या है?

धनतेरस केवल धन और आभूषणों की खरीदारी का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, आरोग्य और समृद्धि के महत्व को भी दर्शाता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा के माध्यम से लोग अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की प्रार्थना करते हैं। यही वजह है कि दीपावली से पहले आने वाले इस पर्व पर धन के साथ स्वास्थ्य को भी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी माना जाता है।


Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019
Powered By Hocalwire