पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने दिखाई जंगल सत्याग्रह, कहा- आदिवासियों के संघर्ष का है सच, पूर्व विधायक ने निभाई भूमिका
- Rohit banchhor
- 13 Jan, 2025
साथ ही कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे ने भी रोल किया हैं। जिसको कांग्रेसियों ने एक साथ बैठकर देखा।
MP News : भोपाल। आदिवासी नायको पर बनी फिल्म जंगल सत्याग्रह का प्रीमियर शो सोमवार को राजधानी भोपाल की विधानसभा सभागार में रखा गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शो का आयोजन करवाया था। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे सहित कई वर्तमान और पूर्व विधायको के साथ नेता मौजूद रहे। इस फिल्म के शो के लिए दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित भाजपा के कई नेताओं को आमंत्रण दिया था। लेकिन बीजेपी के कोई भी नेता इस फिल्म को देखने नहीं पहुंचे। फिल्म में 1930 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जल, जंगल और जमीन के लिए आदिवासी नायकों का संघर्ष दिखाया गया है। फिल्म में 40 किरदार हैं। इसमें बैतूल और नर्मदापुरम जिले के कलाकारों समेत अन्य जिलों के लोग भी शामिल हैं। साथ ही कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे ने भी रोल किया हैं। जिसको कांग्रेसियों ने एक साथ बैठकर देखा।
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पंडित-मौलाना लिखने में नही ऐतराज-
शो से पहले सभागार में अपना संबोधन देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे न तो पंडित लिखने में ऐतराज है और ना ही मौलाना लिखने में। न संत-महात्मा लिखने में और ना ही फादर लिखने में। असल में इस मानसिकता ने ही देश और समाज का सत्यानाश किया है। दिग्विज ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने आदिवासी वर्ग को अधिकार दिए। असल में तो प्राकृतिक संपदा पर पहला अधिकार उन्हीं का है। वही इस मौके पर पूर्व में रिलीज हुई केरला स्टोरी और द साबरमती के सवाल को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर उन्हें आमंत्रित किया जाता तो वह उन फिल्मों को भी देखने जाते। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में एससी एसटी का आजादी के आंदोलन में सबसे बड़ा योगदान जंगल सत्याग्रह का रहा है। अंग्रेजी हुकूमत ने वन संपदा लूटने का नियम लागू किया था, जिसके खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ था। अभी भी गरीबों में एससी एसटी बाहुल्य हैं।

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पीएससी एग्जाम के दौरान आया आइडिया-
फिल्म के डायरेक्टर प्रदीप उईके की मानों तो पीएससी एग्जाम देने के दौरान पूछे गए प्रश्न के बाद उन्हें यह आइडिया आया था। तब उन्होंने सरदार गंजन सिंह कोरकू के बारे में पढ़ना शुरू किया। 3 साल में पूरी कहानी खोज पाया। इस फिल्म को बनाने के लिए मैने समाज के लोगों से मदद मांगी। और आदिवासियों पर बनी फिल्म के लिए एक करोड़ तक राशि जुटाने में बहुत संघर्ष करना पड़ा।
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टंट्या मामा’ की जीवनी और संघर्ष पर बनना चाहिए फिल्म-
बैतूल के आदिवासी नायकों पर बनी फ़िल्म के बाद टंट्या मामा’ की जीवनी और संघर्ष पर आधारित फिल्म बनाए जाने की मांग भी शुरू हो गई हैं। विधानसभा सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आदिवासी नेता उमंग सिंगार, कांतिलाल भूरिया, और जीतू पटवारी समेत सभी नेताओं से आग्रह किया कि जिस तरह आदिवासियों के संघर्ष पर आधारित ‘जंगल सत्याग्रह’ फिल्म बनी है। इसी तरह ‘टंट्या मामा’ की जीवनी और संघर्ष पर आधारित फिल्म बनना चाहिए। दिग्विजय के आग्ह पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि फिल्म बनाने में जो भी सहयोग लगेगा वो उसमें सहयोग करने के लिए तैयार है।

