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ED Raid : छांगुर बाबा के 14 ठिकानों पर ED की छापेमारी, धर्मांतरण, हवाला और विदेशी फंडिंग का खुलासा

ED Raid

इस कार्रवाई का मकसद छांगुर बाबा के अवैध धर्मांतरण नेटवर्क और विदेशी फंडिंग के स्रोतों का पता लगाना है।

ED Raid : बलरामपुर/मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धर्मांतरण और हवाला लेनदेन से जुड़े चर्चित छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार सुबह 5 बजे से उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में 12 और मुंबई में 2 ठिकानों सहित कुल 14 स्थानों पर ED की टीमें छापेमारी कर रही हैं। इस कार्रवाई का मकसद छांगुर बाबा के अवैध धर्मांतरण नेटवर्क और विदेशी फंडिंग के स्रोतों का पता लगाना है।


आलीशान कोठी में चलता था 'गजवा-ए-हिंद' का खेल-

जांच एजेंसियों के अनुसार, छांगुर बाबा ने बलरामपुर के मधुपुर गांव में एक आलीशान कोठी बनाई थी, जो उसके अवैध धर्मांतरण रैकेट का मुख्य केंद्र थी। इस कोठी में न केवल धर्मांतरण की साजिशें रची जाती थीं, बल्कि 'गजवा-ए-हिंद' जैसे खतरनाक मंसूबों को भी अंजाम देने की योजना बनाई जा रही थी। उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) की जांच में खुलासा हुआ कि छांगुर बाबा ने हिंदू महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाया, जिन्हें पहले कलमा पढ़वाया जाता और फिर प्रतिबंधित पशु का मांस खिलाकर उनकी आस्था का परीक्षण किया जाता। इन गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर इस्लामिक देशों की फंडिंग एजेंसियों को भेजी जाती थी, जिसके बदले में मोटी रकम प्राप्त होती थी।


नेपाल सीमा पर 46 गांवों में फैला था नेटवर्क-

ATS की जांच में सामने आया कि छांगुर बाबा का नेटवर्क भारत-नेपाल सीमा से सटे 46 गांवों तक फैला था। वह धार्मिक जलसों के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसाता और जिहाद की ओर झुकाव रखने वालों को आर्थिक मदद का लालच देता। सुरक्षा एजेंसियों को करीब 10 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग की तैयारी के सबूत मिले हैं, जिसमें से अधिकांश राशि नेपाल के रास्ते हवाला के जरिए भारत लाई गई। ED ने 40 से अधिक बैंक खातों की जांच शुरू की है, जिनमें से 18 खातों में 68 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है, जिसमें 7 करोड़ रुपये केवल तीन महीनों में विदेश से आए।


सामाजिक असुरक्षा का फायदा उठाकर फंसाए लोग-

एक सर्वे के अनुसार, छांगुर बाबा के पास सबसे ज्यादा 40-50 वर्ष की आयु वर्ग के लोग आते थे, जो सामाजिक असुरक्षा और असंतोष से जूझ रहे थे। इसके विपरीत, 20-30 वर्ष के युवा, जो अपनी सामाजिक जिंदगी से संतुष्ट थे, कम प्रभावित हुए। छांगुर बाबा इन कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर उन्हें आर्थिक मदद, शादी और अन्य लालच देकर धर्मांतरण के लिए मजबूर करता था।

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