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Deputy CM Ajit Pawar: पावर में अपने चाचा से आगे निकले अजित पवार, महाराष्ट्र की राजनीति में पीछे छूटे शरद पवार

Deputy CM Ajit Pawar: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपनी अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को शानदार

Deputy CM Ajit Pawar: पावर में अपने चाचा से आगे निकले अजित पवार, महाराष्ट्र की राजनीति में पीछे छूटे शरद पवार
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नई दिल्ली/मुंबई। Deputy CM Ajit Pawar: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपनी अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को शानदार जीत दिला कर उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने राजनीतिक जीवन के अंत की अटकलों को झुठलाते हुए एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की है।

Deputy CM Ajit Pawar: अजित पवार ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को शानदार जीत दिलाई, साथ ही अपनी सीट बड़े अंतर से बरकरार रखी। यह उपलब्धि शरद पवार के खिलाफ बगावत के एक साल बाद आई है। इस चुनाव के नतीजेंं बता रहे हैं कि अजित पवार ने अपनी छवि एक स्वतंत्र और प्रभावी नेता के रूप खुद स्थापित करने में सफल रहे।

Deputy CM Ajit Pawar: 59 सीटों पर चुनाव लड़ा और 41 सीटों पर जीत

अजित पवार के नेतृत्व में NCP ने 59 सीटों पर चुनाव लड़ा और 41 सीटें जीतकर 9.01% मत प्रतिशत हासिल किया। यह प्रदर्शन 2024 लोकसभा चुनावों के खराब नतीजों से पूरी तरह उलट है। उन्होंने बारामती से अपने भतीजे और NCP (शरद गुट) के उम्मीदवार युगेंद्र पवार को 1 लाख से अधिक वोटों से हराया। यह उनकी लगातार आठवीं जीत थी।

NCP में विभाजन के बाद बने बड़े धड़े के नेता

अजित पवार का शरद पवार के खिलाफ खड़ा होना उनके राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मोड़ था। उन्होंने एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री पद संभाला और NCP में विभाजन का कारण बने। इसके बाद, उनके नेतृत्व वाले गुट को NCP का नाम और 'घड़ी' चुनाव चिह्न मिला। अजित पवार न केवल राजनीति में बल्कि सहकारी बैंकिंग, शिक्षा, खेल संघों, और दुग्ध संघ जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय रहे हैं।

Deputy CM Ajit Pawar: तीन बार रह चुके हैं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री

अजित पवार ने 1991 में बारामती से अपना पहला चुनाव लड़ा और तब से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अपने तीन दशक लंबे करियर में उन्होंने सिंचाई, जल संसाधन, वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। महाराष्ट्र में वह तीन बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में उनके प्रभाव को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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