Delhi High Court: मां को भी शांति से जीने का हक... जानें किस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बेटे-बहू को बुजुर्ग महिला के घर से बाहर निकाला
Delhi High Court: नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में बेटे और बहू को अपनी बुजुर्ग मां के घर से बाहर निकालने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि वे अपनी मां से संपत्ति तो चाहते हैं, लेकिन उसे शांति से जीने का अधिकार देने के लिए तैयार नहीं हैं। हाईकोर्ट की बेंच, जस्टिस संजीव नरूला की अध्यक्षता में, ने यह भी कहा कि बुजुर्ग महिला के साथ दुर्व्यवहार, वित्तीय शोषण और मानसिक उत्पीड़न के आरोप साबित हुए हैं। यह भी साबित हुआ कि बहू ने अपनी सास पर घरेलू हिंसा का मुकदमा भी दर्ज कराया था, जबकि सास और पति के साथ भी वह अच्छे संबंध नहीं रखती थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बुजुर्ग महिला द्वारा यह कदम लेने का कारण अपने बेटे और बहू से बदला लेना था, क्योंकि उन्होंने उसकी संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की थी।
Delhi High Court: कोर्ट का आदेश और संपत्ति का हक
इस मामले में, जिला मजिस्ट्रेट ने यह विचार किया कि बुजुर्ग महिला की संपत्ति उसके पति द्वारा खरीदी गई थी, जो अब निधन हो चुके हैं, इसलिए अब वह संपत्ति महिला की हो गई है। इसी आधार पर, हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा और बेटे-बहू को घर खाली करने का निर्देश दिया।
Delhi High Court: गुजाराभत्ता और शांति से जीवन जीने की इच्छा
सुनवाई के दौरान, बेटे और बहू ने यह माना कि वे बुजुर्ग महिला को 3 हजार रुपये प्रति माह गुजाराभत्ता देंगे। हालांकि, बुजुर्ग महिला ने स्पष्ट किया कि वह शांति से जीवन जीने के लिए बेटे और बहू को घर छोड़ने की सलाह देती हैं।
Delhi High Court: हवा और रोशनी तक पर रोक
इस मामले में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि बुजुर्ग महिला के बेटे-बहू ने उनके घर की हवा और रोशनी तक रोक दी थी। इसके कारण, बुजुर्ग महिला को जाफराबाद थाने में शिकायत दर्ज करानी पड़ी। पुलिस ने इसे सही पाया। बुजुर्ग महिला अपने अविवाहित बेटे के साथ पहले मंजिल पर रहती थीं, जबकि दूसरे बेटे और बहू दूसरी मंजिल पर रहते थे, और उन्होंने छत पर जाने का रास्ता भी रोक दिया था।

