यूएस से 80,000 करोड़ में परमाणु पनडुब्बियों और 31 प्रीडेटर ड्रोन का सौदा, सैन्य क्षमता को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
नई दिल्ली: भारत सरकार ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और सुदृढ़ करने के लिए दो बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संचालित स्ट्राइक पनडुब्बियों (SSN) के निर्माण और 31 प्रीडेटर ड्रोन के अधिग्रहण को मंजूरी दी। यह निर्णय भारत की समुद्री और निगरानी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।
स्वदेशी SSN पनडुब्बियों का निर्माण
भारत ने अपनी नौसेना को सशक्त करने के लिए दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली स्ट्राइक पनडुब्बियों (SSN) के निर्माण की योजना बनाई है। यह परियोजना विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में क्रियान्वित की जाएगी और भारत की जल युद्ध क्षमता को मजबूत करेगी। ये पनडुब्बियां डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में लंबी अवधि तक पानी के अंदर रह सकती हैं, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत और बढ़ जाएगी। इसके पहले भी भारत के पास तीन परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN) थीं, जो भारत की रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का हिस्सा हैं।
31 प्रीडेटर ड्रोन का अधिग्रहण
सुरक्षा मामलों की इस मंजूरी में 31 प्रीडेटर ड्रोन का अधिग्रहण भी शामिल है, जो अमेरिका स्थित जनरल एटॉमिक्स से खरीदे जाएंगे। ये ड्रोन अत्याधुनिक हथियारों, जैसे हेलफायर मिसाइल और सटीक निर्देशित बमों से लैस होंगे। इनमें से 16 ड्रोन भारतीय नौसेना को दिए जाएंगे और शेष सेना और वायुसेना के बीच साझा किए जाएंगे। इन ड्रोनों से हिंद महासागर में भारत की निगरानी क्षमता को बढ़ावा मिलेगा और समुद्री सुरक्षा, गुप्त गतिविधियों की निगरानी, और अवैध शिपिंग रोकने के लिए महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
₹80,000 करोड़ से अधिक का रक्षा निवेश
दोनों रक्षा सौदों की कुल लागत ₹80,000 करोड़ से अधिक है। यह अधिग्रहण न केवल भारत की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण के प्रयासों में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों, जैसे लार्सन एंड टुब्रो, की बड़ी भागीदारी होगी, जो पनडुब्बी परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

