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Pandariya Recruitment Scam: पंडरिया शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 22 आरोपी के खिलाफ1000 पन्नों का चालान पेश, 320 पदों की भर्ती में हुई थी गड़बड़ी

Pandariya Recruitment Scam: छत्तीसगढ़ के पंडरिया में 1998 की शिक्षाकर्मी भर्ती में कथित गड़बड़ी के मामले में 22 आरोपियों के खिलाफ करीब 1000 पन्नों का चालान पेश किया गया। मामले में 6 तत्कालीन लोकसेवक और 16 चयनित अभ्यर्थी आरोपी हैं।

Pandariya Recruitment Scam: पंडरिया शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 22 आरोपी के खिलाफ1000 पन्नों का चालान पेश, 320 पदों की भर्ती में हुई थी गड़बड़ी
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पंडरिया में वर्ष 1998 में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती में अनियमितताओं के मामले में जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है। करीब 28 साल पुराने इस मामले में 22 आरोपियों के खिलाफ लगभग 1000 पन्नों का चालान विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, कवर्धा की अदालत में पेश किया गया है। आरोपियों में 6 तत्कालीन लोकसेवक और भर्ती में चयनित 16 अभ्यर्थी शामिल हैं। जांच में साक्षात्कार के अंकों में कथित हेरफेर, आरक्षण नियमों के उल्लंघन और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे आरोप सामने आए हैं।

1998 में 320 पदों पर हुई थी भर्ती

यह मामला जनपद पंचायत पंडरिया में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 320 पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया को लेकर तत्कालीन जनपद पंचायत अध्यक्ष अर्जुन तिवारी ने 25 दिसंबर 1998 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में चयन प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार और निर्धारित नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए थे। जांच के बाद वर्ष 2000 में अपराध क्रमांक 48/2000 के तहत मामला दर्ज कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में विवेचना शुरू की गई।

मेरिट सूची और साक्षात्कार प्रक्रिया पर सवाल

जांच एजेंसी के मुताबिक, भर्ती नियमों के अनुसार अभ्यर्थियों की मेरिट सूची अर्हता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जानी थी। रिक्त पदों की संख्या के मुकाबले तीन गुना अभ्यर्थियों को योग्यताक्रम से परीक्षा या साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना था। हालांकि, जांच में आरोप लगाया गया कि प्रवर्गवार सूची तैयार करते समय अर्हता परीक्षा के अंकों के साथ अध्यापन अनुभव के बोनस अंक भी जोड़ दिए गए। इससे अभ्यर्थियों का योग्यताक्रम प्रभावित हुआ और कुछ पात्र अभ्यर्थियों को साक्षात्कार का मौका नहीं मिला, जबकि कुछ अन्य अभ्यर्थियों को नियमों के विपरीत बुलाए जाने की बात सामने आई।

महिला और दिव्यांग आरक्षण में अनियमितता के आरोप

जांच में महिला आरक्षण और दिव्यांग अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में रही। रिकॉर्ड की पड़ताल के दौरान महिला अभ्यर्थियों के अंतिम चयन में क्षैतिज आरक्षण और प्रवर्गवार समायोजन के नियमों का पालन नहीं किए जाने के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। इसी तरह अनुसूचित जाति दिव्यांग वर्ग के चार पदों के लिए पात्र अभ्यर्थियों को बुलाने की प्रक्रिया में भी गड़बड़ी के आरोप सामने आए। जांच एजेंसी के अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक इस वर्ग के 15 दिव्यांग आवेदक होने के बावजूद केवल 10 को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था।

चयन समिति के सदस्यों पर रिश्तेदारों को लाभ देने का आरोप

मामले में चयन समिति के कुछ सदस्यों के रिश्तेदारों का भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना भी जांच का प्रमुख बिंदु रहा। ब्यूरो की विवेचना के अनुसार, तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और सदस्यों बृजबिहारी वैष्णव तथा अंबिकादत्त शर्मा के नजदीकी रिश्तेदार अभ्यर्थियों में शामिल थे। आरोप है कि संबंधित सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों के साक्षात्कार के दौरान उपस्थित रहकर उन्हें अंक दिए। जांच में यह भी सवाल उठाया गया कि साक्षात्कार से पहले रिश्तेदारों के अभ्यर्थी होने की जानकारी घोषित नहीं की गई थी।

कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अध्यापन अनुभव के अंक देने का मामला

जांच के दौरान कुछ चयनित अभ्यर्थियों के अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्रों की भी पड़ताल की गई। एजेंसी के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों ने जिस अवधि में अध्यापन अनुभव का दावा किया, उसी दौरान वे महाविद्यालयों में नियमित विद्यार्थी थे और छात्रवृत्ति भी प्राप्त कर रहे थे। इसके बावजूद उन्हें अनुभव के बोनस अंक दिए जाने की बात जांच में सामने आई है। इन आरोपों के आधार पर संबंधित अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई।

9 तत्कालीन लोकसेवकों की भूमिका जांच के दायरे में

जांच एजेंसी के अनुसार, विवेचना के दौरान कुल 9 तत्कालीन लोकसेवकों और 16 चयनित अभ्यर्थियों की भूमिका सामने आई। इनमें से तीन लोकसेवकों की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद जीवित 6 तत्कालीन लोकसेवकों और 16 अभ्यर्थियों समेत कुल 22 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया। एजेंसी ने दावा किया है कि मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका के अनुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी), 13(2) और आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468 तथा 471 के तहत अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।

चालान में तत्कालीन अधिकारियों के नाम भी शामिल

चालान में जनपद पंचायत पंडरिया के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. भारती और अंबिका प्रसाद शांडिल्य, तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी एन.एल. वस्त्रकार, तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण कवर्धा एन.आर. वर्मा, तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और तत्कालीन सदस्य हरिराम घृतलहरे के नाम शामिल हैं। इनके साथ 16 चयनित अभ्यर्थियों को भी आरोपी बनाया गया है। प्रकरण से जुड़े तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. बढ़ई और शिक्षा स्थायी समिति के तत्कालीन सदस्य बृजबिहारी वैष्णव तथा अंबिकादत्त शर्मा की मृत्यु हो चुकी है। इसकी जानकारी भी न्यायालय में प्रस्तुत चालान में दी गई है।

अब न्यायालय में आगे की कार्रवाई पर नजर

करीब तीन दशक पुराने इस भर्ती मामले में चालान पेश होने के बाद अब न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी। जांच एजेंसी ने भर्ती में कथित अनियमितताओं और आरोपियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेजी तथा मौखिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।


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