Maa Lingeshwari, Pharasgaon: मां लिंगेश्वरी के खुले कपाट, यहां शिवलिंग स्वरूप में विराजमान माता रानी, जानें क्या है मान्यता
Maa Lingeshwari, Pharasgaon: फरसगांव की झाटीबन पहाड़ी स्थित मां लिंगेश्वरी के कपाट खुले। बस्तर महाराजा कमल चंद भंजदेव ने पत्नी संग दर्शन किए। जानिए मंदिर का इतिहास, मान्यताएं और खास परंपराएं।

कोंडागांव। जिले के फरसगांव स्थित आलोर-झाटीबन की पहाड़ी गुफा में विराजी मां लिंगेश्वरी के कपाट बुधवार, 23 सितंबर को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। साल में केवल एक दिन खुलने वाले इस गुफा मंदिर के दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं।
मां लिंगेश्वरी के दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। बस्तर महाराजा कमल चंद भंजदेव ने भी अपनी पत्नी के साथ गुफा में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और संतान प्राप्ति की कामना की। वहीं, गुफा के भीतर शेर के पदचिह्न दिखाई देने की जानकारी सामने आई है, जिसे स्थानीय आस्था में अच्छी बारिश, फसल और सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।
साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं मां लिंगेश्वरी के कपाट
मां लिंगेश्वरी मंदिर की सबसे खास बात इसकी वार्षिक दर्शन परंपरा है। आलोर की पहाड़ी पर प्राचीन गुफाओं के बीच मां लिंगेश्वरी की प्रतिमा विराजमान है और जनश्रुति में इस मंदिर को काफी प्राचीन बताया जाता है।
साल में एक बार विशेष अवसर पर गुफा के पत्थर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं। मां लिंगेश्वरी के दर्शन का सिलसिला रात 12 बजे तक जारी रहेगा। इसके बाद श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर गुफा के कपाट दोबारा बंद किए जाएंगे।
इसी वजह से मंदिर के वार्षिक दर्शन को लेकर भक्तों में पूरे साल इंतजार रहता है। 2026 में मंदिर का द्वार 23 सितंबर को खोला गया। दर्शन के लिए श्रद्धालु कई दिन पहले से ही यहां पहुंचने लगे थे और लंबी कतारें देखने को मिलीं।
गुफा में शिवलिंग स्वरूप में विराजी हैं मां लिंगेश्वरी
आलोर-झाटीबन की पहाड़ी पर स्थित प्राकृतिक गुफा को स्थानीय धार्मिक परंपरा में लिंगई माता या मां लिंगेश्वरी का स्थान माना जाता है। यहां शिवलिंग स्वरूप में विराजमान आकृति की पूजा मां लिंगेश्वरी के रूप में की जाती है।
गुफा और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह स्थान केवल स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है। हर साल छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों के साथ दूसरे राज्यों से भी लोग यहां पहुंचते हैं।
संतान प्राप्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं दंपती
मां लिंगेश्वरी मंदिर से जुड़ी सबसे प्रमुख मान्यताओं में संतान प्राप्ति की कामना शामिल है। कई निःसंतान दंपती यहां माता के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, संतान की कामना लेकर आने वाले दंपती माता को खीरा अर्पित करते हैं। पूजा के बाद पुजारी की ओर से प्रसाद के रूप में खीरा दिया जाता है, जिसे दंपती ग्रहण करते हैं। यह धार्मिक परंपरा और आस्था का हिस्सा है।
गुफा में दिखे शेर के पदचिह्न
इस बार गुफा के कपाट खुलने के बाद अंदर शेर के पदचिह्न दिखाई देते हैं। पुजारियों और स्थानीय आस्था के अनुसार, इन पदचिह्नों को अच्छी बारिश, अच्छी फसल, सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।


