Durg Crime News: कार किसी और की, नंबर किसी और का,चालान और टोल के मैसेज ने खोली पोल, दो आरोपी गिरफ्तार
Durg Crime News: दुर्ग में दूसरे वाहन का नंबर लगाकर कार चलाने के मामले में मोहन नगर पुलिस ने दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया। असली मालिक को चालान और टोल के मैसेज मिल रहे थे।

दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बिना पंजीयन नंबर वाले वाहन को दूसरे वाहन के नंबर पर चलाने का मामला सामने आया है। इस मामले में मोहन नगर थाना पुलिस ने फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दूसरे वाहन का पंजीयन नंबर इस्तेमाल किए जाने के कारण चालान और टोल से जुड़े मैसेज उस नंबर के वास्तविक मालिक के मोबाइल पर पहुंचने लगे थे।
पुलिस ने इस मामले में रोहित कुमार कंकरिया (51), निवासी सिंधिया नगर दुर्ग और अनूप रावलानी (55), निवासी नेहरू नगर भिलाई को गिरफ्तार किया है। इससे पहले पुलिस मामले में विजय सेन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर चुकी है।
दूसरे वाहन का नंबर इस्तेमाल कर सड़क पर चला रहे थे कार
पुलिस की जांच के अनुसार, बिना पंजीयन नंबर वाले वाहन की खरीदी-बिक्री के बाद उसे सड़क पर चलाने के लिए किसी दूसरे वाहन का पंजीयन नंबर इस्तेमाल किया गया।
इस वजह से सड़क पर चलने वाले वाहन की पहचान दूसरे वाहन के नंबर से हो रही थी। इसी नंबर पर जारी होने वाले ट्रैफिक चालान और टोल से जुड़े मैसेज दूसरे वाहन के वास्तविक मालिक के मोबाइल नंबर पर पहुंचने लगे। यहीं से मामले में गड़बड़ी सामने आई और पुलिस की जांच आगे बढ़ी।
विजय सेन की गिरफ्तारी के बाद सामने आई अन्य आरोपियों की भूमिका
मोहन नगर थाना पुलिस ने इस मामले में पहले विजय सेन को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को बिना पंजीयन नंबर वाले वाहन की खरीदी-बिक्री और दूसरे वाहन का नंबर इस्तेमाल करने में अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस ने मामले में फरार आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान रोहित कुमार कंकरिया और अनूप रावलानी की भूमिका सामने आने पर पुलिस टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
वाहन और नंबर के दुरुपयोग की जांच जारी
पुलिस अब पूरे मामले में बिना पंजीयन वाले वाहन की खरीदी-बिक्री, उसके इस्तेमाल और दूसरे वाहन के पंजीयन नंबर के कथित दुरुपयोग से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
इसके साथ ही वाहन के लेन-देन और मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामला कैसे सामने आया?
इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी चालान और टोल से जुड़े संदेश बने। जिस वाहन का नंबर इस्तेमाल किया जा रहा था, उसके वास्तविक मालिक को ऐसे मैसेज मिलने लगे। इससे वाहन के नंबर के गलत इस्तेमाल का संदेह पैदा हुआ और जांच के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई।


