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CG Tiger Poaching Case CBI Investigation: छत्तीसगढ़ में बाघ शिकार मामले की अब CBI करेगी जांच,बड़े नेटवर्क की आशंका

CG Tiger Poaching Case CBI Investigation: छत्तीसगढ़ में बाघ शिकार और खाल तस्करी से जुड़े मामलों की जांच अब CBI करेगी। तीन बाघों की खाल बरामद हो चुकी है और 9 आरोपी गिरफ्तार हैं।

CG Tiger Poaching Case CBI Investigation: छत्तीसगढ़ में बाघ शिकार मामले की अब CBI करेगी जांच,बड़े नेटवर्क की आशंका
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाघों के शिकार और उनकी खाल-पंजों की तस्करी से जुड़े मामलों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगा। राज्य सरकार ने कांकेर और इंद्रावती टाइगर रिजर्व से जुड़े दो वन अपराध मामलों की जांच CBI को सौंपने के लिए सहमति दे दी है। गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।

सरकार की मंजूरी के बाद जांच एजेंसी को इन मामलों से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की पड़ताल करने का अधिकार मिल गया है। जांच में शिकार से लेकर बाघ की खाल और पंजों की तस्करी तक की पूरी कड़ी को खंगाला जाएगा।

दो वन अपराध मामलों की होगी CBI जांच

राज्य सरकार ने कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल में 29 जून 2026 को दर्ज वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09 और इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 5 जुलाई 2026 को दर्ज वन अपराध प्रकरण क्रमांक 22108/01 की जांच CBI को सौंपने पर सहमति दी है।

तीन बाघों की खाल बरामद, 9 आरोपी गिरफ्तार

बता दें कि, जून-जुलाई 2026 के दौरान कांकेर, बीजापुर और इंद्रावती टाइगर रिजर्व से जुड़े इलाकों में कार्रवाई के दौरान तीन बाघों की खाल बरामद किए गए थे। मामले में अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

प्रारंभिक जांच में बाघों के पंजों और खाल की तस्करी से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई थी जिसके बाद वन विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।

महाराष्ट्र और तेलंगाना तक जुड़े तार

जांच के दौरान तस्करी के तार छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र और तेलंगाना तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में महाराष्ट्र पुलिस की विशेष शाखा के एक सिपाही और एक पुलिस मुखबिर की भूमिका सामने आने की बात भी कही गई है।

अब CBI जांच में इन सभी कड़ियों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल की जाएगी। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि बाघों के शिकार, वन्यजीव अंगों की बरामदगी और तस्करी के पीछे कितने लोग और कौन-कौन से नेटवर्क सक्रिय थे।

वन विभाग की सिफारिश के बाद मिली मंजूरी

मामले में अंतरराज्यीय कनेक्शन सामने आने और नेटवर्क के विस्तार की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने CBI जांच की सिफारिश की थी। विभाग की ओर से गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था।

राज्य सरकार की सहमति के बाद अब CBI के लिए मामले की जांच का रास्ता साफ हो गया है। जांच में बाघों के शिकार के साथ-साथ खाल और पंजों की तस्करी तथा इससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।

बाघ संरक्षण के सामने बढ़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या को लेकर भी यह मामला महत्वपूर्ण है। राज्य में बाघों की संख्या वर्तमान में 35 बताई जा रही है। ऐसे में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी के मामले संरक्षण व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

अब CBI जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ में सामने आए बाघ शिकार के मामलों के पीछे स्थानीय स्तर का अपराध था या इसके तार किसी बड़े अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं।


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