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Chhattisgarh Cancer Declared Notifiable Disease: छत्तीसगढ़ में 17,611 कैंसर केस, अब हर मरीज की जानकारी देनी होगी, जानें सरकार ने क्यों लेना पड़ा फैसला

Chhattisgarh Cancer Declared Notifiable Disease बनाया गया है। अब सरकारी-निजी अस्पताल और लैब को कैंसर के मामलों की जानकारी एक महीने में देनी होगी।

Chhattisgarh Cancer Declared Notifiable Disease: छत्तीसगढ़ में 17,611 कैंसर केस, अब हर मरीज की जानकारी देनी होगी, जानें सरकार ने क्यों लेना पड़ा फैसला
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच राज्य सरकार ने इसे नोटिफाइड डिजीज घोषित किया है। यानी अब कैंसर के हर पक्के या संदिग्ध मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाना जरूरी होगा। लोक स्वास्थ्य-परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।

नई व्यवस्था के दायरे में सरकारी और निजी अस्पतालों के अलावा मेडिकल कॉलेज, पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर की देखभाल से जुड़े अन्य संस्थान भी आएंगे। कैंसर की पुष्टि होने के बाद संबंधित जानकारी तय प्रक्रिया के तहत एक महीने के भीतर देनी होगी।

कैंसर के हर केस की जानकारी देना जरूरी

अभी प्रदेश में कैंसर के मामलों की जानकारी मुख्य रूप से कैंसर रजिस्ट्री में स्वैच्छिक आधार पर दर्ज की जाती है। सरकार के मुताबिक, इस वजह से कुछ मामले रिकॉर्ड में नहीं आ पाते।

नई व्यवस्था में कैंसर के मामलों का डेटा एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे राज्य में कैंसर के मामलों की स्थिति को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

संदिग्ध केस में क्या होगा?

अगर किसी मरीज में कैंसर का संदेह होता है तो इलाज करने वाले डॉक्टर को उसे जरूरी जांच के लिए भेजना होगा। जांच में कैंसर की पुष्टि होने पर पैथोलॉजिस्ट को निर्धारित कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म भरना होगा।

इसकी जानकारी भी बीमारी की पहचान के एक महीने के भीतर संबंधित प्राधिकारी को उपलब्ध करानी होगी।

सरकारी से निजी संस्थानों तक सभी दायरे में

नई अधिसूचना का दायरा केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं है। इसके तहत राज्य और केंद्र सरकार के अस्पताल, निजी अस्पताल, डिस्पेंसरी, स्वास्थ्य संस्थान और सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

इसके अलावा पैथोलॉजी और हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर तथा कैंसर की देखभाल से जुड़े एनजीओ भी इस व्यवस्था के दायरे में होंगे।

कैंसर के इलाज और जांच से जुड़े डॉक्टरों और पैथोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होगी कि वे सामने आने वाले मामलों की जानकारी तय समय सीमा में उपलब्ध कराएं।

डेटा से कैंसर की रोकथाम की रणनीति बनाने में मदद

सरकार के अनुसार, कैंसर के मामलों का व्यवस्थित डेटा मिलने से बीमारी की निगरानी और रोकथाम की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

डेटा के आधार पर राज्य में कैंसर के मामलों की संख्या, बीमारी के फैलाव और इससे होने वाली मौतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही कैंसर स्क्रीनिंग और इलाज से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का भी आकलन किया जा सकेगा।

इस जानकारी का इस्तेमाल इलाज की सुविधाएं बढ़ाने, कैंसर रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने तथा भविष्य की स्वास्थ्य योजनाएं तैयार करने में भी किया जा सकता है।

26 जिलों में चल रहे डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर

प्रदेश में फिलहाल 3 सरकारी कैंसर अस्पताल और 2 सरकारी रेडियोथेरेपी यूनिट हैं। इसके अलावा 26 जिलों में जिला डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।

पांच और जिलों में ऐसे सेंटर शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

ढाई साल में 17,611 कैंसर केस दर्ज

राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में कैंसर के 17,611 मामले दर्ज किए गए।

देखें आंकड़े: -

1- 4,465 मुख कैंसर

2- 210 गले के कैंसर

3- 252 जीभ के कैंसर

4- 1,038 फेफड़ों के कैंसर

5- 2,633 स्तन कैंसर

6- 2,200 गर्भाशय कैंसर

7- 2,560 पेट के कैंसर

8- 4,253 अन्य प्रकार के कैंसर

नोटिफाइड डिजीज के तौर पर कैंसर के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग शुरू होने के बाद राज्य के पास बीमारी से जुड़ा अधिक व्यवस्थित डेटा उपलब्ध होने की उम्मीद है। यही जानकारी आगे स्क्रीनिंग, इलाज और कैंसर नियंत्रण से जुड़ी योजनाओं की दिशा तय करने में उपयोगी होगी।


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