CG Agriculture : बालोद के किसान का अनोखा आविष्कार, 1.70 लाख में तैयार की मशीन; मिनटों में खेत में छिड़काव
9 लाख की मशीन का देसी जुगाड़, बालोद के किसान टिकेंद्र साहू ने 1.70 लाख में तैयार किया फर्टिलाइजर स्प्रेडर, पांच मिनट में एक एकड़ में खाद और कीटनाशक का छिड़काव
CG Agriculture : बालोद। खेती में बढ़ती लागत और महंगी कृषि मशीनों के बीच छत्तीसगढ़ बालोद जिला के ग्राम अरकार के 28 साल के युवा किसान टिकेंद्र साहू ने अपने हुनर और तकनीकी समझ से कम लागत वाला कृषि यंत्र तैयार किया है जो पांच मिनट में एक एकड़ में खाद और कीटनाशक का छिड़काव कर सकता है।
बीए तक पढ़ाई करने वाले टिकेंद्र ने मोबाइल के जरिए कृषि मशीनों की कार्यप्रणाली समझी और कबाड़ तथा घर में उपलब्ध लोहे के सामान से ट्रैक्टर कंबाइंड फर्टिलाइजर स्प्रेडर बना दिया। यह मशीन खेत में खाद और कीटनाशक दवा का एक साथ छिड़काव करती है। इससे किसानों को अलग-अलग मशीनों का इस्तेमाल करने और बार-बार खेत में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे समय और श्रम के साथ डीजल की भी बचत होने की उम्मीद है।
9 से 10 लाख की मशीन, 1.70 लाख में तैयार
टिकेंद्र ने बताया कि बाजार में इसी तरह की मशीन इंजन सहित करीब 9 से 10 लाख रुपए में उपलब्ध है। इतनी अधिक कीमत के कारण सामान्य किसानों के लिए इसे खरीदना मुश्किल है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कम लागत में इसका विकल्प तैयार करने का प्रयास किया।
कबाड़ और पहले से उपलब्ध लोहे के सामान का इस्तेमाल करते हुए करीब 1.70 लाख रुपए की लागत में यह मशीन तैयार की। टिकेंद्र का कहना है कि हरियाणा और पंजाब के कई किसान इस तरह की मशीनों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बालोद जिले में किसानों के लिए ऐसी सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से उन्होंने अपने स्तर पर इसे तैयार करने का फैसला किया।
फर्टिलाइजर स्प्रेडर देखने पहुंचे कृषि विभाग के अफसर
टिकेंद्र के इस नवाचार की जानकारी मिलने पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मशीन का निरीक्षण किया। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सोमदास साहू और वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सीएल ठाकुर ने मशीन की कार्यप्रणाली को देखा और इसकी सराहना की।
अधिकारियों के अनुसार कम लागत में तैयार किया गया यह कृषि यंत्र किसानों का श्रम कम करने और खेती की लागत घटाने की दिशा में उपयोगी प्रयास है। स्थानीय स्तर पर किसानों द्वारा किए जा रहे ऐसे नवाचार आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के साथ खेती को अधिक सुविधाजनक बनाने में भी मदद कर सकते हैं।



