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Bastar Dussehra: बस्तर दशहरा की शुरुआत आज, मां दंतेश्वरी मंदिर में पाट जात्रा पूजा में पूरी होगी ठुरलू खोटला की रस्म, 75 दिनों तक चलेंगे कार्यक्रम

Bastar Dussehra: जगदलपुर। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत बुधवार, 12 अगस्त को हरेली अमावस्या के अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ होगी। मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में आयोजित होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और सेवादार शामिल होंगे।

Bastar Dussehra:  बस्तर दशहरा की शुरुआत  आज, मां दंतेश्वरी मंदिर में पाट जात्रा पूजा में पूरी होगी ठुरलू खोटला की रस्म, 75 दिनों तक चलेंगे कार्यक्रम
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Bastar Dussehra: जगदलपुर। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत बुधवार, 12 अगस्त को हरेली अमावस्या के अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ होगी। मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में आयोजित होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और सेवादार शामिल होंगे।

इस दौरान रथ निर्माण के लिए आवश्यक औजार तैयार करने की परंपरा के तहत ठुरलू खोटला रस्म भी अदा की जाएगी। बस्तर दशहरा समिति ने पाट जात्रा पूजा विधान में मांझी-चालकी, मेंबर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों के साथ ही गणमान्य नागरिकों और ग्रामीणों से उपस्थित होकर आयोजन में शामिल होने का आग्रह किया है।

75 दिनों तक होंगे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान

पाट जात्रा पूजा विधान के साथ शुरू होने वाला यह ऐतिहासिक पर्व करीब 75 दिनों तक चलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार, 24 सितंबर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, शनिवार, 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा विधान और रविवार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना पूजा विधान होगा। सोमवार, 12 अक्टूबर को जोगी बिठाई पूजा विधान के बाद मंगलवार, 13 अक्टूबर से रविवार, 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान आयोजित किया जाएगा। 18 अक्टूबर को सुबह 11 बजे बेल पूजा विधान होगा।

महाअष्टमी से मावली परघाव तक चलेगा क्रम

सोमवार, 19 अक्टूबर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान होगा। मंगलवार, 20 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान और मावली परघाव का आयोजन होगा। बुधवार, 21 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा तथा गुरुवार, 22 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान संपन्न होगा।शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह काछन जात्रा पूजा विधान के बाद दोपहर में मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा।

कुटुम्ब जात्रा के बाद मावली माता की विदाई से होगा समापन

शनिवार, 24 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान के तहत ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई की जाएगी। इसके बाद मंगलवार, 27 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का समापन होगा।

बस्तर दशहरा की खासियत: बस्तर दशहरा अपने अनूठे धार्मिक, सांस्कृतिक और जनजातीय परंपराओं के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। इसकी विभिन्न रस्मों में बस्तर की सदियों पुरानी लोक परंपराओं और देवी-देवताओं के प्रति आस्था की झलक देखने को मिलती है।


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