CG News : सावन से पहले गोबर की चित्रकारी, समृद्धि और सुरक्षा की प्राचीन परंपरा आज भी जिंदा
- Rohit banchhor
- 10 Jul, 2025
इसे बढ़ावा देने के लिए हम स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेंगे।
CG News : बेमेतरा। छत्तीसगढ़ में सावन आते ही त्यौहारों का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी सावन माह की शुरुआत से पहले गोबर से चित्रकारी की अनोखी और प्राचीन परंपरा आज भी जीवंत है। जिला मुख्यालय के विभिन्न वार्डों और गांवों में महिलाएं सावन के स्वागत में घरों की दीवारों, दरवाजों और आंगनों पर गोबर से बनी खास चित्र या आलिपि बनाती हैं। यह परंपरा न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि इसे समृद्धि, अच्छी बारिश, फसल की प्रचुरता और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गोबर से बनी ये चित्रकारी सावन में होने वाले असाध्य रोगों से मनुष्यों और मवेशियों की रक्षा करती है। बेमेतरा के ग्राम पंचायतों जैसे नवागढ़, साजा और बेरला में महिलाएं अपने हाथों से गोबर, मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर जटिल और सुंदर डिजाइन बनाती हैं, जिनमें फूल, पेंटिंग और प्रतीकात्मक आकृतियां शामिल होती हैं। ये चित्र न केवल घरों को सजाते हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति सम्मान और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश भी देती हैं। स्थानीय निवासी और बुजुर्ग गीता बाई ने बताया, “हमारी दादी-नानी के समय से यह परंपरा चली आ रही है।
गोबर को पवित्र माना जाता है, और इससे बनी चित्रकारी से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह हमें बुरी शक्तियों और बीमारियों से बचाती है।” बेमेतरा के सांस्कृतिक संगठनों ने भी इस परंपरा को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं शुरू की हैं, ताकि युवा पीढ़ी इसे सीखकर आगे बढ़ाए। जिला प्रशासन ने इस अनोखी परंपरा को संरक्षित करने के लिए इसे स्थानीय उत्सवों और मेले में प्रदर्शित करने की योजना बनाई है। कलेक्टर रमेश शर्मा ने कहा, “यह परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। इसे बढ़ावा देने के लिए हम स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेंगे।”

