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Share Market Crash: सेंसेक्स 813 अंक टूटा, निफ्टी 23,432 पर बंद, IT शेयरों में भारी बिकवाली

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट रही। सेंसेक्स 813 अंक और निफ्टी 203 अंक टूटा। IT शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई।

Share Market Crash: सेंसेक्स 813 अंक टूटा, निफ्टी 23,432 पर बंद, IT शेयरों में भारी बिकवाली
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नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 9 सितंबर को लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट जारी रही। IT, रियल्टी और फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली के चलते बाजार का सेंटीमेंट कमजोर रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों अपने दिन के निचले स्तर के आसपास बंद हुए।

बुधवार को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 फीसदी गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 फीसदी की गिरावट के साथ 23,431.50 पर आ गया। दोनों प्रमुख इंडेक्स 11 जून के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुए।

IT शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

आज के कारोबार में IT शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निफ्टी IT इंडेक्स 3.24 फीसदी टूट गया, जिससे यह दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सेक्टर इंडेक्स रहा। HCLTech, Infosys और Tech Mahindra जैसे बड़े IT शेयरों में भारी गिरावट रही।TCS पर भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इसके अलावा IT और टेलीकॉम से जुड़े व्यापक शेयरों में भी कमजोरी रही। निफ्टी MidSmall IT & Telecom इंडेक्स 1.79 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

रियल्टी और फाइनेंशियल शेयर भी दबाव में

बाजार में बिकवाली का दबाव सिर्फ IT सेक्टर तक सीमित नहीं रहा। रियल्टी और फाइनेंशियल शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। ऑटो, फार्मा, PSU बैंक, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स समेत ज्यादातर प्रमुख सेक्टर इंडेक्स भी गिरावट के साथ बंद हुए।

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, बाजार की चिंता बढ़ी

भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चा तेल करीब छह सप्ताह में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई, आयात बिल और आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लगातार तेजी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत रही जिसका असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर देखने को मिला।


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