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RBI MPC Meeting October 2026: दिवाली से पहले RBI दे सकता है बड़ा झटका, इतनी बढ़ सकती है लोन की EMI 5 अक्टूबर से शुरू होगी MPC बैठक

RBI MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होगी। रेपो रेट पर फैसले से EMI, FD, लोन और बाजार पर असर पड़ सकता है। जानिए क्या है विशेषज्ञों का अनुमान।

RBI MPC Meeting October 2026: दिवाली से पहले RBI दे सकता है बड़ा झटका, इतनी बढ़ सकती है लोन की EMI 5 अक्टूबर से शुरू होगी MPC बैठक
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक होने जा रही है। इस बैठक पर आम लोगों से लेकर बैंकिंग और शेयर बाजार तक की नजर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या RBI इस बार रेपो रेट में बदलाव करेगा। बैठक के बाद 7 अक्टूबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का फैसला घोषित करेंगे।

RBI ने पिछली चार मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है। इससे पहले 2025 में केंद्रीय बैंक ने कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी। अब महंगाई में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख के बीच अक्टूबर की बैठक काफी महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या बढ़ सकता है रेपो रेट?

बाजार और अर्थशास्त्रियों के बीच इस बार रेपो रेट बढ़ाए जाने की चर्चा तेज है। एक सर्वे में 10 में से 8 अर्थशास्त्रियों ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है।

अगर RBI 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करता है, तो रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा। ऐसा हुआ तो यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली रेपो रेट बढ़ोतरी होगी। हालांकि, यह अभी विशेषज्ञों का अनुमान है और अंतिम फैसला MPC के सदस्य बैठक में लेंगे।

महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता

रेपो रेट को लेकर सबसे अहम वजहों में महंगाई को माना जा रहा है। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जो RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। Reuters के मुताबिक, अगस्त की महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर रही। खाद्य और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने भी दबाव बढ़ाया है।

इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी RBI के लिए चुनौती बनी हुई हैं। महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल, रुपये और घरेलू महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

रुपये और वैश्विक ब्याज दरों पर भी नजर

इस बैठक के दौरान RBI के सामने सिर्फ घरेलू महंगाई ही मुद्दा नहीं होगा। वैश्विक केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरों में बदलाव और रुपये की स्थिति भी अहम भूमिका निभा सकती है।

Reuters के मुताबिक, इस साल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 6 फीसदी कमजोर हुआ है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के बढ़ने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में RBI के फैसले पर बाजार की नजर बनी हुई है।

अगर रेपो रेट बढ़ा तो आपकी EMI पर क्या असर होगा?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए पैसा देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

ऐसे में अगर अक्टूबर की बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI बढ़ने या लोन की अवधि बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक अपनी ब्याज दरों में कितना बदलाव करते हैं।

FD और सेविंग पर क्या हो सकता है असर?

रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कर्ज लेने वालों पर ही नहीं पड़ता। बैंक जमा और FD की ब्याज दरों में भी बदलाव कर सकते हैं। अगर बैंक डिपॉजिट रेट बढ़ाते हैं, तो FD और बचत करने वाले ग्राहकों को ज्यादा ब्याज मिलने की संभावना बन सकती है।

हालांकि, बैंक अपने फंड की जरूरत और बाजार की स्थिति के हिसाब से ब्याज दरों में बदलाव करते हैं। इसलिए RBI के फैसले के बाद हर बैंक की FD या लोन दर में समान बदलाव हो, यह जरूरी नहीं है।

7 अक्टूबर को साफ होगी RBI की रणनीति

अक्टूबर की MPC बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि RBI को एक तरफ बढ़ती महंगाई और वैश्विक दबाव से निपटना है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बनाए रखना है। हालिया अनुमानों में कई अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर के बाद दिसंबर में भी एक और 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ोतरी की संभावना जताई है।


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