Noel Tata-Chandrasekaran dispute: नोएल टाटा की आपत्ति खारिज, एन. चंद्रशेखरन ही बने रहेंगे टाटा संस के बॉस
Noel Tata-Chandrasekaran dispute: टाटा संस ने नोएल टाटा की आपत्ति खारिज कर एन. चंद्रशेखरन की दोबारा चेयरमैन नियुक्ति को सही बताया। जानिए पूरा विवाद और आगे की प्रक्रिया।

मुंबई। टाटा ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की उस आपत्ति को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने एन. चंद्रशेखरन की दोबारा चेयरमैन नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
टाटा संस साफ किया कि, चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने का फैसला बोर्ड ने बहुमत से लिया है और इसमें कंपनी के नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ। कंपनी ने यह भी कहा है कि जिस आर्टिकल 118 का हवाला नोएल टाटा ने दिया, वह मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर लागू नहीं होता।
क्या है पूरा मामला?
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल आगे बढ़ाने का फैसला बोर्ड की ओर से लिया गया है। हालांकि, इस प्रक्रिया पर नोएल टाटा ने आपत्ति जताई थी।
नोएल टाटा ने कंपनी के आर्टिकल 118 का हवाला देते हुए कहा था कि टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी को देखते हुए चेयरमैन के चयन के लिए तय प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
उनके मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के प्रतिनिधियों वाली चयन समिति की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण है।
उनकी आपत्ति खास तौर पर इस बात को लेकर थी कि क्या यही प्रक्रिया मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति के समय भी अपनाई जानी चाहिए।
टाटा संस ने दिया क्या जवाब
24 सितंबर को टाटा संस ने नोएल टाटा को लिखे पत्र में उनकी आपत्ति पर अपना जवाब दिया।
कंपनी ने कहा कि आर्टिकल 118 का प्रावधान नए चेयरमैन की पहली नियुक्ति के लिए है। मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर यह प्रावधान लागू नहीं होता।
टाटा संस के मुताबिक, बोर्ड ने बहुमत से एन. चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने का फैसला किया है और यह प्रक्रिया कंपनी के नियमों तथा लागू कानून के अनुरूप है।
कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय की ओर से भेजे गए पत्र में इसी कानूनी स्थिति को विस्तार से समझाया गया है।
कानूनी राय का भी लिया गया सहारा
टाटा संस ने अपने फैसले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों की राय भी ली है। कंपनी ने शुरुआत में वरिष्ठ वकील सुदीप्तो सरकार से इस मुद्दे पर राय ली थी।
इसके बाद नोएल टाटा की ओर से सवाल उठाए जाने पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बीएन श्रीकृष्ण से भी कानूनी राय ली गई।
कंपनी का कहना है कि इन कानूनी विशेषज्ञों की राय उसके बोर्ड के फैसले के पक्ष में है। संबंधित कानूनी राय की प्रतियां भी कंपनी के सभी निदेशकों के साथ साझा की गई हैं।
AGM क्यों टली थी?
टाटा संस की सालाना आम बैठक यानी AGM भी इस पूरे मामले में चर्चा का हिस्सा रही है।
18 अगस्त को होने वाली AGM कोरम पूरा नहीं होने के कारण टालनी पड़ी थी। कंपनी के मुताबिक, इसका कारण यह था कि टाटा ट्रस्ट्स आर्टिकल 86 के तहत अपना संयुक्त प्रतिनिधि नामित नहीं कर पाए थे।
टाटा संस ने यह भी स्पष्ट किया कि AGM टलने और 17 सितंबर को चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर बोर्ड के प्रस्ताव के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद पर बने रहने का मामला अब आगे की औपचारिक प्रक्रिया से गुजरेगा।
कंपनी अधिनियम की धारा 152 के तहत एक नई बैठक बुलाई जाएगी।
इसमें शेयरधारक चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद पर बने रहने को लेकर फैसला करेंगे। इस मामले में टाटा ट्रस्ट्स की आपत्तियों के बाद अब अगली शेयरधारक बैठक की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।


