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Budhni-Vijaypur By-Election :आदिवासियों के वोट से निकलेगी जीत की राह,जाटव खेमे को साधने हो रही मशक्कत

2005 में हुए उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने इस सीट को जीता, उसके बाद से कांग्रेस को अब तक यहां जीत नसीब नहीं हुई है।

Budhni-Vijaypur By-Election :आदिवासियों के वोट से निकलेगी जीत की राह,जाटव खेमे को साधने हो रही मशक्कत
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Budhni-Vijaypur By-Election : भोपाल। बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीट पर हो रहे चुनाव में मतदान 13 नवंबर को होना है। इन दोनों क्षेत्रों में पिछले एक पखवाड़े से अपनी पूरी ताकत झोंक रहे भाजपा और कांग्रेस नेताओं का अंतिम दिनों में फोकस जातीय गणित पर आ गया है। विजयपुर में आदिवासी तो बुधनी में ओबीसी वोटर निर्णायक माने जा रहे हैं। इन दोनों सीटों पर आदिवासी वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए हर तरह के जतन सियासी दल कर रहे हैं। सबसे पहले बात बुधनी की। 2003 ये यह सीट भाजपा के कब्जे में हैं। 2005 में हुए उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने इस सीट को जीता, उसके बाद से कांग्रेस को अब तक यहां जीत नसीब नहीं हुई है।


Budhni-Vijaypur By-Election : पूर्व सीएम ने पिछला चुनाव 80 हजार से अधिक रिकार्ड मतों से जीता था। जहां तक कांग्रेस की बात करें वह यहां से अंतिम बार 1998 में जीती थी।तब कांग्रेस से टिकट पर देवकुमार पटेल जीते थे, उसके पहले उनके भाई राजकुमार पटेल ने यहां से जीत दर्ज की थी। राजकुमार पटेल को कांग्रेस ने फिर प्रत्याशी बनाया है। यहां किरार वोटों की संख्या ज्यादा है। कांग्रेस ने इसी फैक्टर को ध्यान में रखते हुए पटेल को मैदान में उतारा है। भाजपा के रमाकांत भार्गव के पक्ष में शिवराज सिंह चौहान भी प्रचार कर चुके हैं। उनके पुत्र कार्तिकेय भी प्रचार में लगे हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी यहां दौरे कर चुके हैं। शिवराज सिंह की लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा यहां जीत के प्रति आश्वस्त है। वहीं विजयपुर में उसे ज्यादा ताकत लगानी पड़ रही है। भाजपा का दामन थामने के बाद इस्तीफा देकर रावत फिर चुनाव मैदान में हैं।


Budhni-Vijaypur By-Election : जाटव वोट अपने पक्ष में करने की कवायद-
विजयपुर में आदिवासी मतदाता करीब साठ हजार हैं तो उसके बाद दूसरा सबसे बड़ा वर्ग जाटव समुदाय का है। आदिवासी वोटों को ही ध्यान में रख कांग्रेस ने इस वर्ग से आने वाले मुकेश मल्होत्रा को टिकट दिया है। पिछली बार वे निर्दलीय रूप से चुनाव लड़े थे और 44 हजार से अधिक मत ले गए थे। आदिवासी मतों को साधने के लिए भाजपा ने पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी को सहारिया विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया है। पहले यह वोट कांग्रेस का माना जाता था पर अब भाजपा इसमें सेंध लगा चुकी है। इसके बाद दूसरे नंबर पर जाटव समाज आता है। इस वर्ग के यहां 33 हजार से अधिक मतदाता हैं। यह वर्ग बसपा का कोर वोट बैंक माना जाता है। इसके अलावा इस सीट पर बसपा का प्रभाव भी है।


Budhni-Vijaypur By-Election : बसपा उम्मीदवार बाबूलाल मेवरा को 2018 के चुनाव में 35 हजार से अधिक वोट मिले थे, वहीं 2023 में बाबूलाल मेवरा के भाजपा से उम्मीदवार बन जाने पर बसपा ने दारा सिंह को टिकट दिया था। उन्हें भी 34 हजार से अधिक मत मिले थे। भाजपा कांग्रेस की नजर इसी वोट बैंक पर है। कांग्रेस से यह वोट बैंक साधने के लिए बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और अब भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया को सक्रिय किया है। वहीं भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री लाल सिंह भी पसीना बहा रहे हैं। यह वोट जिस तरफ जाएगा, उसका पड़ला भारी होना तय है। भाजपा की ओर से मंत्री राकेश शुक्ला, नारायण सिंह कुशवाह समेत कई विधायकों ने डेरा डाल रखा है।


Budhni-Vijaypur By-Election : चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद से सीएम यहां तीन बार आ चुके हैं। अब तक यहां चार सौ करोड़ के विकास कामों का ऐलान भी हो चुका है। भाजपा विकास के नारे को लेकर चुनाव मैदान में है तो कांग्रेस ने यहां बिकाऊ बनाम टिकाऊ का नारा दिया है। खास बात यह है कि भाजपा ने अब तक प्रदेश से बाहर के किसी नेता को नहीं बुलाया है। वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश के नेताओं के अलावा सचिन पायलट, भंवर जितेन्द्र सिंह जैसे नेता दौरा कर चुके हैं।

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