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भोपाल एम्स ने रचा इतिहास: पसलियों के कैंसर से जूझ रहे मासूम की चेस्ट वॉल फिर से बनाई

भोपाल एम्स

भोपाल। एम्स भोपाल में पसलियों में कैंसर (इंबिंग सारकोमा) से जूझ रहे आठ साल के बच्चे की दुर्लभ सर्जरी कर जान बचाई गई। कैसर ट्यूमर हटाने के बाद बच्चे की चेस्टबॉल का बड़ा हिस्सा खराब हो गया था। जिसे रिकस्ट्रक्टिव सर्जरी कर शरीर के टिश्यु से ही तैयार किया गया। यह दुनिया का पहला मामला है जब इतने छोटे बच्चे के लिए रिकंस्ट्रक्टिव तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो।

बीते एक साल में दो बच्चों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा चुका है। दोनों बच्चे अब पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। यह दोनों मामले प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक सर्जन्स में प्रकाशित किए गए हैं। एम्स से मिली जानकारी के मुतानिक आठ साल का किशोर (परिवर्तित नाम) बचपन से ही पसलियों के कैंसर से जूझ रहा था। उम्र के साथ कैंसर ट्यूमर पसलियों के साथ गले और अन्य जगहों पर भी फैल गया था।


कीमोथैरेपी के बाद की गई सर्जरी
एम्स भोपाल के सर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. रियाज अहमद ने बताया कि बच्चे की जांच के बाद अलग अलग चरणों में उपचार का प्लान तैयार किया गया। सबसे पहले कीमोथैरेपी से ट्यूमर को हटाया गया। इसके बावजूद पसलियों में करीब 10 सेंटीमीटर का ट्यूमर रह गया था। इसे सर्जरी के माध्यम से हटाया गया। हालांकि इससे चेस्ट वॉल के बड़े हिस्से पर घाव रह गया था। इसे भरने के लिए प्लास्टिक सर्जरी विषेशज्ञों ने रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का करने का निर्णय लिया।


बच्चे की जांघ से लिए गए टिश्यू
डॉ. अहमद के मुताबिक सर्जरी के लिए जांघ से टिश्यू (टेंसर फैशिया लाटा) का उपयोग करने का निर्णय लिया गया। टिश्यु से वॉल तैयार करने के बाद इस पर मांसपेशियों की परत चढ़ाई गई। इस अत्यधिक जटिल सर्जरी के बाद जो पहले वैटिलेटर पर था, 12 घंटों के भीतर वेंटिलेटर से हटा दिया गया और छठे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।



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