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Ayodhya: राम मंदिर में ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने किए सप्तऋषि के दर्शन, जानिए इनके बारे में

Ayodhya

Ayodhya: अयोध्या: अयोध्या, प्रभु श्रीराम की पावन नगरी, एक बार फिर दिव्य रोशनी और श्रद्धा से सराबोर हो उठी। मंगलवार को राम मंदिर में भव्य ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोपहर करीब 12 बजे मंदिर के शिखर पर ध्वजा फहराकर नए इतिहास का अंकन किया। इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सहित कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे।


Ayodhya: ध्वजारोहण से पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर परिसर स्थित सप्तऋषि मंदिर में पहुंचकर वहां स्थापित महान ऋषियों के दर्शन और पूजा-अर्चना की। राम मंदिर परिसर में स्थापित इन सात दिव्य व्यक्तित्वों में महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, अगस्त्य मुनि, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह और माता शबरी सम्मिलित हैं। इन सभी का श्रीराम के जीवन में विशेष और अविस्मरणीय योगदान रहा है।


Ayodhya: सप्तऋषि: वैदिक परंपरा के अमर स्तंभ

हिंदू धर्म में सप्तऋषियों को वैदिक ज्ञान के संरक्षक और ब्रह्मा जी के मानस पुत्र माना गया है। शास्त्रों में जिन सप्तऋषियों का उल्लेख मिलता है, वे हैं-कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज। इन्हें अत्यंत तपस्वी, विद्वान और वेदों के ज्ञाता के रूप में जाना जाता है। आकाश में स्थित “सप्तर्षि तारामंडल” इन्हीं महापुरुषों की स्मृति को सहेजे हुए है।


Ayodhya: राम मंदिर में स्थापित सप्तऋषि एवं दिव्य पात्र


महर्षि वशिष्ठ

भगवान राम के राजगुरु और दशरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ऋषि को त्रिकालदर्शी और महान तपस्वी माना जाता है। उनके सान्निध्य में ही राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न ने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की।


महर्षि विश्वामित्र

राजा से ऋषि बने विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को दिव्य अस्त्र–शस्त्र का ज्ञान दिया तथा सीता स्वयंवर तक उन्हें ले गए। उनके तप से प्राप्त ब्रह्मर्षि पद का उल्लेख विशेष रूप से मिलता है।


अगस्त्य मुनि

वनवास के दौरान अगस्त्य मुनि ने भगवान राम को रावण वध हेतु दिव्य अस्त्र प्रदान किए। उन्हें मार्गदर्शन कर लंका विजय का मार्ग प्रशस्त किया।


महर्षि वाल्मीकि

आद्यकवि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की। माता सीता ने इन्हीं के आश्रम में शरण ली और यहीं लव–कुश का जन्म हुआ। ऋषि वाल्मीकि ने ही दोनों पुत्रों को वेद, शास्त्र और शस्त्र विद्या सिखाई।


ऋषि गौतम एवं देवी अहिल्या

गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बनी अहिल्या को भगवान राम ने पुनः जीवन प्रदान किया। गौतम ऋषि को ब्रह्मगिरी पर्वत पर मां गंगा को अवतरित करने का श्रेय भी मिलता है।


निषादराज गुह

श्रीराम के सच्चे मित्र निषादराज गुह ने वनवास के दौरान गंगा पार कराने से पहले उनके चरण धोकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उनका सेवाभाव रामायण में भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।


माता शबरी

शुद्ध प्रेम और सरल भक्ति की प्रतीक माता शबरी ने वर्षों तक राम की प्रतीक्षा की। उन्होंने भगवान राम को अपने हाथों से चुने हुए मीठे बेर अर्पित किए-जो भक्ति की निश्छलता का सर्वोच्च उदाहरण माने जाते हैं।


Ayodhya: अयोध्या में उमड़ा उत्साह

ध्वजारोहण के दौरान अयोध्या नगरी दीपों, पुष्पों और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से गूंज उठी। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस ऐतिहासिक क्षण ने एक बार फिर दर्शाया कि राम की नगरी केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है।

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