Vinesh Phogat: विनेश फोगाट मामले में दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, WFI को लगाई फटकार, कहा- 'मां बनना गुनाह नहीं, बदले की भावना से काम न करें'

By :  Vpb
Update: 2026-05-22 12:41 GMT

Vinesh Phogat: नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को पहलवान विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) के मामले में कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर विनेश की फिटनेस और खेल में वापसी की स्थिति का मूल्यांकन किया जाए, ताकि उन्हें आगामी एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने का अवसर मिल सके।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि मातृत्व के बाद खिलाड़ियों की वापसी को सकारात्मक नजरिए से देखा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि शीर्ष खिलाड़ियों को मौका देने की पुरानी परंपरा से हटना कई सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई को ‘प्रतिशोध की भावना’ से बचने की सलाह दी।

बदले की भावना से काम न करें

पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि 'हमारे देश में मां बनने को सेलिब्रेट किया जाता है, ये कोई गुनाह नहीं है और कुश्ती संघ को बदले की भावना से काम नहीं करना चाहिए।'

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, ‘वह जुलाई 2025 में मां बनीं. अभी मई का महीना है. वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहलवान हैं. क्यों न माना जाए कि आपने उनके लिए चयन मानदंड में बदलाव किया होगा? विवाद या मतभेद चाहे जो भी हो, खेल जगत को क्यों नुकसान होना चाहिए? देश में मातृत्व का सम्मान होता है, क्या इसकी कीमत किसी व्यक्ति को चुकानी चाहिए?’ अदालत ने आगे कहा, ‘सर्कुलर में किए गए बदलाव से सब कुछ साफ हो जाता है. ऐसा व्यवहार न करें. यह खेलों के हित में नहीं है. पहले के सर्कुलर का पालन न करना बहुत कुछ बताता है.’

दरअसल, डब्ल्यूएफआई ने अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विनेश फोगाट को जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने से अयोग्य घोषित कर दिया था। महासंघ का कहना था कि वापसी से पहले जरूरी छह महीने का नोटिस नहीं दिया गया। विनेश ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अब अदालत ने केंद्र से सुनिश्चित करने को कहा है कि निष्पक्ष तरीके से उनकी स्थिति का आकलन किया जाए।

Tags:    

Similar News