Police Smriti Diwas 2026: उत्तर प्रदेश में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पुलिस बल के योगदान को याद करते हुए कानून-व्यवस्था में आए बदलावों का जिक्र किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के मोटरसाइकिल, मोबाइल और वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने पिछली सरकारों के कार्यकाल में पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर भी निशाना साधा।

पुलिस की कार्रवाई में राजनीतिक हस्तक्षेप का लगाया आरोप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस अधिकारियों को भी संकोच करना पड़ता था। उनके मुताबिक, अपराधियों पर कार्रवाई किए जाने पर सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे और कार्रवाई अपराधियों के बजाय संबंधित अधिकारियों पर हो जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में अपराधी खुलेआम हथियार लहराते थे और पुलिसकर्मियों को सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ता था।

योगी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में अपराधियों को कानून का भय महसूस हो रहा है। उन्होंने आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख करते हुए बताया कि एटीएस ने देवबंद से लेकर सीमावर्ती जिलों तक कमांड सेंटर स्थापित कर स्लीपर सेल और घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है।

सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर का मोटरसाइकिल भत्ता बढ़ा

पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। फील्ड ड्यूटी करने वाले सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इससे फील्ड में तैनात अधिकारियों को मिलने वाले भत्ते में 300 रुपये की बढ़ोतरी होगी।

पीपीएस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भी राहत

मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक, पीपीएस अधिकारियों का यूनिफॉर्म भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल का मोबाइल भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह किया गया है। इन फैसलों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान आवश्यक संसाधनों और खर्चों के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराना है।

पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास क्या है?

पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में शहीद हुए भारतीय पुलिसकर्मियों के बलिदान की याद दिलाता है। उस समय भारतीय पुलिस की टीमें उत्तरी सीमा पर निगरानी और गश्त कर रही थीं। इसी दौरान चीनी सैनिकों के हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इन जवानों के साहस और सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देने के लिए हर साल इस दिन देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हॉट स्प्रिंग्स में कैसे हुआ था हमला?

अक्टूबर 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स इलाके में गश्त के लिए निकली तीन टीमों में से दो वापस लौट आई थीं, लेकिन तीसरी टीम के दो पुलिसकर्मी और एक पोर्टर वापस नहीं आए। लापता साथियों की तलाश के लिए 21 अक्टूबर को करम सिंह के नेतृत्व में करीब 20 पुलिसकर्मियों की टीम आगे बढ़ी। इसी दौरान चीनी सैनिकों ने टीम पर हमला कर दिया। गोलीबारी में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए, जबकि सात को बंदी बना लिया गया। अन्य पुलिसकर्मी वहां से निकलने में सफल रहे।

1960 में 21 अक्टूबर को चुना गया पुलिस स्मृति दिवस

हॉट स्प्रिंग्स में शहीद हुए जवानों की स्मृति में जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। तब से हर साल इस तारीख पर देशभर में शहीद पुलिसकर्मियों को याद किया जाता है और उनके कर्तव्य, साहस तथा बलिदान को नमन किया जाता है।

सीआरपीएफ के 10 जवानों ने दिया था सर्वोच्च बलिदान

21 अक्टूबर 1959 को शहीद हुए 10 जवान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से संबंधित थे। इनमें ईमान सिंह, पूरन सिंह, नुरबू लामा, बेगराज, माखनलाल, शिवनाथ, मनजीत सुबा, धरम सिंह, श्रवण दास और शोरिंग नुरबू शामिल थे। इन जवानों ने देश की उत्तरी सीमा की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका बलिदान पुलिस स्मृति दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक साल में 154 पुलिसकर्मियों ने गंवाई जान

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। इनमें उत्तर प्रदेश पुलिस के छह जवान भी शामिल हैं। शहीद जवानों में उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, आरक्षी अशोक कुमार, आरक्षी प्रदीप कुमार, फायर सर्विस चालक तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित कुमार यादव के नाम शामिल हैं।

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में भी दी जाती है श्रद्धांजलि

देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिसकर्मियों के योगदान तथा उनके बलिदान को सम्मान देने के लिए नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2018 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। यह स्मारक उन पुलिसकर्मियों की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। पुलिस स्मृति दिवस पर देशभर में आयोजित कार्यक्रम इसी समर्पण और बलिदान को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं।

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