नई दिल्ली। Trump Tariff War: जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमन ने आगाह किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा हाल ही में घोषित टैरिफ नीतियों के कारण मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है। बता दें कि अमेरिका ने भारतीय आयात पर शुल्क को बढ़ाकर 26% कर दिया है और ब्राजील से आने वाले उत्पादों पर 10% टैरिफ लगा दिया है।

Trump Tariff War: अपने शेयरधारकों को लिखे वार्षिक पत्र में डिमन ने सुझाव दिया कि अमेरिका को भारत जैसे देशों के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते विकसित करने चाहिए, न कि उनसे अमेरिका के साथ जुड़ने की अपेक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, हाल ही में लागू किए गए टैरिफ से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है, जिसके चलते कई लोग मंदी की संभावना पर विचार कर रहे हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि बाजार का मूल्यांकन अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचा है।

Trump Tariff War: डिमन ने कहा, "ये गंभीर और कुछ हद तक अभूतपूर्व ताकतें हमें बेहद सावधान रहने के लिए मजबूर करती हैं।" उनका मानना है कि भले ही टैरिफ से मंदी न हो, लेकिन यह आर्थिक विकास को धीमा जरूर कर देगा। डिमन ने बताया कि अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों (भू-राजनीति सहित) का सामना कर रही है, जिसमें कर सुधार और नियमों के संभावित सकारात्मक प्रभाव, टैरिफ और "व्यापार युद्ध" के नकारात्मक प्रभाव, लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति, ऊंचा राजकोषीय घाटा, और अभी भी अधिक परिसंपत्ति मूल्य व अस्थिरता शामिल हैं।

Trump Tariff War: उनके अनुसार, टैरिफ के कुछ महत्वपूर्ण अल्पकालिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। डिमन ने कहा, अल्पावधि में हमें मुद्रास्फीति के परिणाम दिखाई दे सकते हैं, जो न केवल आयातित वस्तुओं पर असर डालेगा, बल्कि इनपुट लागत बढ़ने और घरेलू उत्पादों की मांग बढ़ने से घरेलू कीमतों पर भी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के अपने कुछ करीबी सहयोगियों के साथ व्यापार समझौते नहीं हैं। डिमन ने सुझाव दिया कि वाशिंगटन भारत जैसे गुटनिरपेक्ष देशों के प्रति दोस्ताना रवैया अपनाकर उन्हें करीब ला सकता है।

Trump Tariff War: डिमन ने कहा, प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ उच्च-स्तरीय व्यापार को बढ़ावा देना न केवल अच्छी आर्थिक नीति है, बल्कि शानदार भू-राजनीति भी है। हमें भारत और ब्राजील जैसे गुटनिरपेक्ष देशों से हमारे साथ जुड़ने की मांग करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, हम व्यापार और निवेश के जरिए दोस्ती का हाथ बढ़ाकर उन्हें अपने करीब ला सकते हैं।