CWG 2026: भारत ने पैरा एथलेटिक्स में किया डबल धमाका, दिलीप गावित ने जीता गोल्ड, मोहम्मद बेसिल ने सिल्वर किया अपने नाम
ग्लासगो। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए यादगार दिन रहा। पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में भारत ने गोल्ड और सिल्वर दोनों पदक अपने नाम कर ऐतिहासिक डबल पोडियम हासिल किया। 23 वर्षीय दिलीप महादु गावित ने 10.71 सेकेंड के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि 21 वर्षीय मोहम्मद बेसिल मोर्सिंगानाकथ ने 10.83 सेकेंड में रजत पदक अपने नाम किया। इंग्लैंड के केविन सैंटोस 10.85 सेकेंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
दिलीप गावित ने आखिरी 30 मीटर में पलटा मुकाबला
स्कॉटस्टन स्टेडियम में हुए फाइनल की शुरुआत दिलीप गावित के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। रेस के शुरुआती हिस्से में वह पांचवें स्थान पर चल रहे थे, जबकि मोहम्मद बेसिल और केविन सैंटोस आगे दिखाई दे रहे थे। लेकिन आखिरी 30 मीटर में दिलीप ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी और देखते ही देखते सभी धावकों को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने 10.71 सेकेंड के शानदार समय के साथ फिनिश लाइन पार कर गोल्ड पर कब्जा किया।
उनका यह समय नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बन गया। इसके साथ ही दिलीप एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा-एथलीट बन गए।
मोहम्मद बेसिल ने फोटो फिनिश में जीता सिल्वर
दूसरी ओर, मोहम्मद बेसिल और केविन सैंटोस के बीच सिल्वर मेडल के लिए बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला। दोनों के बीच अंतर महज कुछ सेकेंड के हिस्से का रहा और फोटो फिनिश के जरिए बेसिल को विजेता घोषित किया गया। 10.83 सेकेंड के समय के साथ उन्होंने रजत पदक हासिल किया।
बेसिल के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला मेडल है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने T47 100 मीटर में गोल्ड और सिल्वर दोनों जीतकर इतिहास रच दिया।
परिवार और कोच को समर्पित किया पहला इंटरनेशनल मेडल
रजत पदक जीतने के बाद मोहम्मद बेसिल भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार और कोच को दिया। बेसिल ने बताया कि उनके परिवार ने काफी संघर्ष किया है और उनके दोनों भाई भी दिव्यांग हैं। उन्होंने कहा कि परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और यही समर्थन उनकी सफलता की बड़ी वजह रहा।
दिलीप बोले- शुरुआत धीमी थी, फिर बढ़ाई रफ्तार
स्वर्ण पदक जीतने के बाद दिलीप गावित ने कहा कि उनकी शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन उन्होंने रेस के दौरान अपनी गति बढ़ाई और आखिर में जीत हासिल करने में सफल रहे। बारिश के कारण ट्रैक गीला था, जिससे फाइनल में खिलाड़ियों के लिए चुनौती और बढ़ गई थी।
दिलीप ने साफ किया कि उनका लक्ष्य केवल कॉमनवेल्थ गेम्स तक सीमित नहीं है। वह आगामी पैरा एशियन गेम्स और लॉस एंजेलिस पैरालंपिक में भी शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए और पदक जीतना चाहते हैं।
पेड़ से गिरने के बाद गंवाया था हाथ
महाराष्ट्र के नासिक से आने वाले दिलीप गावित की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। बचपन में पेड़ से गिरने के बाद गंभीर चोट के कारण उन्हें अपना दायां हाथ गंवाना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और स्थानीय कोच के मार्गदर्शन में एथलेटिक्स की शुरुआत की।
साल 2019 में उन्होंने खेलो इंडिया गेम्स में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया, जिसके बाद उनके करियर को नई दिशा मिली। 2023 हांगझोउ पैरा एशियन गेम्स में उन्होंने 400 मीटर T47 स्पर्धा में गोल्ड जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। बाद में उन्होंने 400 मीटर के बजाय 100 मीटर स्प्रिंट पर ध्यान केंद्रित किया और अब ग्लासगो में रिकॉर्डतोड़ गोल्ड जीतकर अपने फैसले को सही साबित कर दिया।
डिस्कस थ्रो में भारत को नहीं मिला पदक
हालांकि, पैरा एथलेटिक्स की पुरुष डिस्कस थ्रो F42-44/F61-64 स्पर्धा में भारत को निराशा मिली। सागर थयात छठे और देवेंद्र कुमार सातवें स्थान पर रहे। सागर ने 51.79 मीटर का थ्रो किया, जो उनका सीजन बेस्ट और एशियाई रिकॉर्ड रहा, जबकि देवेंद्र कुमार ने 48.20 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज किया।