नई दिल्ली। भारतीय बॉक्सर अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स 2026 में 80 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर अपने नाम बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 के फैसले से हराया। अंकुश ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक और नियंत्रित बॉक्सिंग दिखाई और तीनों राउंड में अपनी बढ़त बनाए रखी।


पहली बार एशियन गेम्स में उतरे, सीधे गोल्ड पर किया कब्जा

अंकुश पंघाल का यह पहला एशियन गेम्स था और डेब्यू में ही उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इससे पहले वह 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी 80 किलो वर्ग का स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। एशियन गेम्स में उनकी जीत ने उन्हें भारतीय पुरुष मुक्केबाजी के प्रमुख नामों में शामिल कर दिया है। वह 2018 के बाद एशियन गेम्स में पुरुष मुक्केबाजी का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने हैं।


कबड्डी से शुरू हुआ सफर, फिर बॉक्सिंग ने बदली जिंदगी

अंकुश के खेल करियर की शुरुआत बॉक्सिंग से नहीं, बल्कि कबड्डी से हुई थी। वह राज्य स्तर तक कबड्डी खेल चुके थे। परिवार से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, करीब 11 साल की उम्र में उनके पिता ने उन्हें कबड्डी छोड़कर बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद हिसार के गंगवा गांव में कोच प्रदीप सावंत के मार्गदर्शन में उन्होंने बॉक्सिंग की बारीकियां सीखनी शुरू कीं।

शुरुआती दौर में उनके पास आधुनिक ट्रेनिंग सुविधाएं भी नहीं थीं। स्थानीय स्तर पर सीमित संसाधनों के बीच अभ्यास करते हुए उन्होंने अपनी तकनीक और फिटनेस पर काम किया। बाद में यही मेहनत उनके खेल की पहचान बन गई। अंकुश की ट्रेनिंग में कठिन शारीरिक अभ्यास और रेत पर दौड़ जैसी एक्सरसाइज भी शामिल रही हैं।


हार के बाद छोड़ना चाहते थे बॉक्सिंग

अंकुश का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। शुरुआती करियर में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा। एक समय ऐसी स्थिति आई जब वह बॉक्सिंग छोड़ने के बारे में सोचने लगे थे, लेकिन परिवार और कोच के समर्थन ने उन्हें दोबारा रिंग में लौटने के लिए तैयार किया। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने खेल पर मेहनत की और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू की।


कॉमनवेल्थ गोल्ड के बाद एशियन गेम्स में भी सुनहरी जीत

अंकुश ने 2026 में कॉमनवेल्थ गेम्स के 80 किलो वर्ग में भी स्वर्ण पदक जीता था। फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को हराकर गोल्ड हासिल किया था। इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी ताकत और कौशल की सराहना की थी।


एशियन गेम्स में वर्ल्ड चैंपियन को भी दी थी मात

एशियन गेम्स के फाइनल तक पहुंचने के दौरान अंकुश ने सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के मौजूदा विश्व चैंपियन फाजलिद्दीन एरकिनबोएव को 4-1 से हराया था। मुकाबले में शुरुआती राउंड गंवाने के बाद अंकुश ने शानदार वापसी की और निर्णायक तीसरे राउंड में अपना दबदबा कायम किया।


भारतीय बॉक्सिंग के लिए भी खास उपलब्धि

अंकुश की जीत के साथ भारत ने एशियन गेम्स 2026 में बॉक्सिंग में गोल्ड की हैट्रिक पूरी की। उनके अलावा परवीन हुड्डा और लवलीना बोरगोहेन ने भी अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। इस तरह अंकुश ने व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ भारतीय बॉक्सिंग के लिए भी एशियन गेम्स में यादगार दिन का हिस्सा बनाया।

छोटे गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे अंकुश पंघाल की कहानी अब लगातार आगे बढ़ रही है। कबड्डी से बॉक्सिंग तक का सफर, शुरुआती संघर्ष और लगातार बड़ी प्रतियोगिताओं में सफलता ने उनके करियर को नई पहचान दी है।