नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक सप्लाई चेन संकट को पार करते हुए भारत के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बनी सहमति के बाद, रूस से S-400 'ट्रायम्फ' एयर डिफेंस सिस्टम की पांचवीं और अंतिम रेजिमेंट अगले महीने नवंबर 2026 तक भारत पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही 40,000 करोड़ रुपये का यह ऐतिहासिक रक्षा समझौता पूरा हो जाएगा।

नवंबर 2026 तक पूरी होगी 40 हजार करोड़ की डील

भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ इस मेगा डिफेंस डील पर हस्ताक्षर किए थे। मूल योजना के अनुसार इसे 2024 तक पूरा होना था, लेकिन युद्धजनित परिस्थितियों और वैश्विक प्रतिबंधों के कारण रूस ने डिलीवरी के लिए 2026 की नई समय-सीमा तय की थी। चौथी रेजिमेंट के सफलतापूर्व ऑपरेशनल होने के बाद अब पांचवीं खेप के आने का रास्ता साफ हो गया है।

पहले से तैनात 4 चक्रव्यूह कर रहे हैं देश की रक्षा

भारतीय वायुसेना के बेड़े में S-400 की चार रेजिमेंट पहले ही शामिल की जा चुकी हैं और वे देश के आसमान की मुस्तैदी से रखवाली कर रही हैं।

पश्चिमी मोर्चा:- तीन स्क्वाड्रन को पंजाब, राजस्थान और जम्मू सेक्टरों में अग्रिम सुरक्षा कवच के रूप में तैनात किया गया है।

उत्तरी मोर्चा:- एक स्क्वाड्रन को चीन की हरकतों पर लगाम लगाने के लिए रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है।

पांचवीं रेजिमेंट के भारत पहुंचते ही इसे मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख या पूर्वोत्तर के संवेदनशील हवाई क्षेत्र की निगरानी के लिए तैनात किए जाने की संभावना है। इससे 'टू-फ्रंट वॉर' (दोतरफा युद्ध) की स्थिति में भारत की वायु सीमा पूरी तरह अभेद्य हो जाएगी।

क्यों 'आसमानी महाबली' कहलाता है S-400?

S-400 ट्रायम्फ को दुनिया की सबसे आधुनिक और अचूक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (SAM) माना जाता है। इसकी मारक क्षमता दुश्मनों के होश उड़ाने के लिए काफी है।

रडार ट्रैकिंग:- इसका अत्याधुनिक रडार 600 किलोमीटर के दायरे में एक साथ 300 से अधिक लक्ष्यों (जैसे ड्रोन, क्रूज मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें और स्टेल्थ फाइटर्स) को ट्रैक कर सकता है।

चार स्तरीय सुरक्षा कवच:- यह सिस्टम 40 किमी, 100 किमी, 200 किमी और 400 किमी की रेंज वाली चार अलग-अलग मिसाइलों से लैस है।

घातक प्रहार:- यह एक साथ 72 से अधिक मिसाइलें दागकर दुश्मन के किसी भी हथियार को पलक झपकते नेस्तनाबूद कर सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतिम रेजिमेंट के मिलने से चीन के पांचवीं पीढ़ी के J-20 स्टेल्थ लड़ाकू विमान और पाकिस्तान के F-16 जेट्स के लिए भारतीय सीमा में ताक-झांक करना असंभव हो जाएगा।

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