RSS शताब्दी वर्ष: प्रधानमंत्री मोदी ने की मोहन भागवत के भाषण की तारीफ, पंच परिवर्तन को बताया सामाजिक बदलाव का अहम जरिया
राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
RSS Vijayadashami Utsav 2026: नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान दिए गए संबोधन की सराहना की है। पीएम मोदी ने आज मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उनके भाषण को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि संबोधन में राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बात की गई।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति संघ के स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने पंच परिवर्तन की अवधारणा को भी अहम बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सार्थक योगदान दिया जा सकता है।
पीएम मोदी ने किन मुद्दों पर की मोहन भागवत की तारीफ?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि मोहन भागवत ने देश की प्रगति और सामाजिक एकता से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने पर दिए गए जोर को भी उल्लेखनीय बताया।
A very motivating address by Param Pujya Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji during the Shatabdi Varsh Shri Vijayadashami Utsav in Nagpur.
He has spoken at length on a wide range of issues including national progress and social unity, the need for self-reliance and to strengthen the character of society.
Particularly noteworthy was his emphasis on the commitment to Seva and nation building that is integral to every RSS Swayamsevak.
He also spoke about the Panch Parivartan and how these can contribute meaningfully to positive social change.
@RSSorg
@DrMohanBhagwat
https://t.co/G6Rg2wX4KH
— Narendra Modi (@narendramodi) October 20, 2026
पीएम मोदी के अनुसार, सेवा और राष्ट्र निर्माण की भावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने संघ की इस भावना और पंच परिवर्तन के जरिए सकारात्मक सामाजिक बदलाव की संभावनाओं को रेखांकित किया।
क्या है RSS की पंच परिवर्तन अवधारणा?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पंच परिवर्तन अवधारणा में समाज और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पांच प्रमुख विषयों पर जोर दिया जाता है।
-सामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव कम करना और आपसी सद्भाव बढ़ाना।
-कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संवाद, संस्कार और जिम्मेदारी की भावना मजबूत करना।
-पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति की रक्षा करना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना।
-स्वदेशी और स्वबोध: स्वदेशी उत्पादों, भारतीय पहचान और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
-नागरिक अनुशासन: नागरिक कर्तव्यों का पालन करना और समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी निभाना।
इस अवधारणा का उद्देश्य सामाजिक जीवन, पारिवारिक व्यवहार, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों में सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करना है।
1925 में हुई थी RSS की स्थापना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन की थी। संघ वर्ष 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम आयोजित कर रहा था। 20 अक्टूबर 2026 का नागपुर विजयादशमी उत्सव शताब्दी समारोहों के समापन वर्ष का हिस्सा है।
इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव में संबोधन दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके विचारों की सराहना करते हुए सेवा, राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव के महत्व को रेखांकित किया।