Parliament: संसद में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन: साधु के वेश में पहुंचे पप्पू यादव, राहुल गांधी ने चढ़ाया चढ़ावा, राम मंदिर चढ़ावे और छात्र कार्रवाई पर सरकार को घेरा
Parliament: नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में दानपेटी लेकर संसद पहुंचे और सांकेतिक नाटक के जरिए विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के कई सांसद शामिल हुए।
साधु के वेश में किया सांकेतिक प्रदर्शन
संसद के मकर द्वार के सामने दानपेटियां रखी गईं, जहां पप्पू यादव साधु के भेष में बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी सांसदों ने दानपेटी में पैसे डाले, जबकि पप्पू यादव ने उन्हें अपनी जेब में रखकर राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी के आरोपों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने "अमित शाह इस्तीफा दो", "अमित शाह सदन में आओ" और "चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़" जैसे नारे लगाए।
#WATCH | Delhi | Monsoon Session of the Parliament | Opposition MPs including Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi protest over the issue of alleged Ayodhya Ram Mandir donations embezzlement pic.twitter.com/1BXa6UiUuq
— ANI (@ANI) July 31, 2026
विपक्ष ने उठाई इस्तीफे की मांग
इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्ष का कहना है कि वह राम मंदिर चढ़ावे के कथित मामले और छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगता रहेगा।
खरगे और राहुल ने पहले भी उठाए थे सवाल
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था, "हमारे युवाओं और छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई। या तो यह गृह मंत्री अमित शाह की मंजूरी से हुआ या फिर उनकी जानकारी और निर्देश पर हुआ। दोनों ही स्थितियां गृह मंत्री या प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती हैं।" वहीं राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि "अमित शाह या तो इस मामले के लिए जिम्मेदार हैं या फिर इस पद के लिए सक्षम नहीं हैं।" उन्होंने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की थी।